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टुइलाडुंगरी शीतला माता मंदिर में श्रद्धा के साथ मनाया गया हलषष्ठी ‘कमर छठ’ पर्व, सैकड़ों माताओं ने की संतान की मंगलकामना

जमशेदपुर, 2 सितंबर 2026: टुइलाडुंगरी स्थित श्री श्री शीतला माता मंदिर परिसर में बुधवार को हलषष्ठी ‘कमर छठ’ पर्व श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सैकड़ों महिलाओं ने संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना को लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति की ओर से मंदिर के सभागार में विशेष रूप से अस्थायी तालाब यानी ‘सगरी’ का निर्माण कराया गया था। इसी के समीप महिलाओं ने सामूहिक रूप से हलषष्ठी माता का पूजन किया और कथा का श्रवण कर पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए।

पूजा को लेकर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। महिलाओं ने व्रत रखकर अपनी संतान के सुखद और मंगलमय जीवन की कामना की।

मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि हलषष्ठी ‘कमर छठ’ केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि मातृत्व की श्रद्धा, संतान के प्रति ममता और भारतीय लोक परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व भारतीय संस्कृति, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का काम करते हैं।

उन्होंने बताया कि हलषष्ठी पर्व को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम के जन्म से भी जोड़कर देखा जाता है। भगवान बलराम का प्रमुख आयुध हल होने के कारण इस पर्व का संबंध कृषि, श्रम, धरती और प्रकृति से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को माताएं संतान के कल्याण के लिए यह व्रत करती हैं।

पूजा में दिखी प्रकृति और कृषि संस्कृति की झलक

हलषष्ठी पूजा में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार झरबेरी, पलाश, कांस और कुश जैसी वनस्पतियों के साथ विभिन्न पारंपरिक अनाज और पूजन सामग्री का इस्तेमाल किया गया। महुआ, पसहर चावल, चना, जौ, धान, अरहर, मूंग, मक्का आदि सामग्री का भी परंपरा के अनुसार उपयोग किया गया।

मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार हलषष्ठी की पूजा में कृषि और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व है। कई क्षेत्रों में प्रतीकात्मक तालाब बनाकर उसके समीप पूजा करने की परंपरा है। हालांकि पूजा की विधि और सामग्री अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।

समिति ने की विशेष व्यवस्था

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। अध्यक्ष दिनेश कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष मोतीलाल साहू, महामंत्री गिरधारी लाल, उपाध्यक्ष परमानंद कौशल और कोषाध्यक्ष त्रिवेणी कुमार के नेतृत्व में आयोजन की व्यवस्था की गई।

महिलाओं को पूजा और कथा सुनाने का कार्य परमानंद कौशल ने किया। आयोजन में जमुना निषाद, इंदा साहू, मंजू साहू, द्रोपदी साहू, हेमा साहू, मंजू ठाकुर, पिंकी कुमारी, कमला निषाद, फुलेश्वरी निषाद, फूलों देवी, पुष्पा निषाद, कुंती देवी, राजवती देवी, देववती, चित्रा साहू, पार्वती देवी, चंदा देवी, सोनी, पूनम ठाकुर, तिज्या निषाद और प्राची निषाद सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

वहीं आयोजन में युवाओं ने भी सहयोग किया। रोशन साहू, ओम निषाद और दीपक सिन्हा समेत अन्य युवाओं ने व्यवस्था संभालने में सहयोग दिया। पूजा के दौरान मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति, श्रद्धा और मंगलकामनाओं का वातावरण बना रहा।

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