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*बाल संरक्षण को लेकर जिला स्तरीय कन्वर्जेन्स वर्कशॉप आयोजित*

चाईबासा: सृजन महिला विकास मंच द्वारा जिला बाल संरक्षण इकाई के सहयोग से सोमवार को जिला परिषद के मीटिंग हॉल, चाईबासा में बाल संरक्षण हितधारकों के साथ एक दिवसीय जिला स्तरीय कन्वर्जेन्स वर्कशॉप आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े मामलों की पहचान और समाधान के लिए विभिन्न विभागों, संस्थाओं एवं समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। साथ ही बच्चों को शोषण, हिंसा, बाल मजदूरी, बाल विवाह और पलायन जैसी परिस्थितियों से बचाकर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डालसा सचिव रवि चौधरी, उद्द्यान केंद्र की मेंटर रीता सिंह और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य विकास दोदराजका उपस्थित रहे। इसके अलावा पीएलवी, चाइल्डलाइन, पॉक्सो सपोर्ट स्टाफ, मुखिया, पंचायत सचिव, ग्रामीण मुंडा और वार्ड सदस्य सहित बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की।

वर्कशॉप में बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के गठन की प्रक्रिया, कार्यप्रणाली, सदस्यों की भूमिका एवं जिम्मेदारियों के साथ बाल अधिकारों की सुरक्षा, बच्चों से जुड़े मामलों की पहचान और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। समुदाय की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

डालसा सचिव रवि चौधरी ने कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में कानूनी सहायता और न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। समुदाय, पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल संरक्षण संस्थाओं और नागरिक समाज को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

पूर्व सदस्य विकास दोदराजका ने कहा कि बच्चों को पलायन, बाल मजदूरी और अन्य सामाजिक चुनौतियों से बचाने के लिए गांव और पंचायत स्तर पर बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों को सक्रिय करना जरूरी है। वहीं उद्द्यान केंद्र की मेंटर रीता सिंह ने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए परिवार और समुदाय की भूमिका पर जोर दिया।

संस्था सचिव नर्गिस खातून ने बताया कि सृजन महिला विकास मंच की ओर से बच्चों की शिक्षा और संरक्षण के लिए स्टडी लर्निंग सेंटर, रेमेडियल सपोर्ट सेंटर और किशोरी संसाधन केंद्र के माध्यम से सहयोग दिया जा रहा है। किशोरियों के लिए फुटबॉल प्रशिक्षण तथा मैट्रिक और इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग एवं मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।

वर्कशॉप में बाल मजदूरी, बाल विवाह, पलायन, शोषण एवं हिंसा, पॉक्सो मामलों, जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान, रिपोर्टिंग और सरकारी योजनाओं से बच्चों को जोड़ने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्र की चुनौतियां साझा करते हुए आपसी समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में कहा गया कि बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित बैठक, मामलों की पहचान, रिपोर्टिंग और फॉलोअप के माध्यम से सक्रिय रूप से कार्य करें। पंचायत और गांव स्तर पर बेहतर तालमेल से बच्चों से जुड़े मामलों का समय पर समाधान किया जा सकता है। उक्त जानकारी सृजन महिला विकास मंच के इस्लाम ने दी।

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