चाईबासा: प्रकृति की आराधना और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक महापर्व करम मंगलवार को चाईबासा शहर में पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर उरांव समाज के सातों अखाड़ों में विशेष आयोजन किए गए। करम पर्व को लेकर सुबह से ही समाज के लोगों में उत्साह देखा गया। पारंपरिक वेशभूषा में महिला-पुरुष और युवाओं ने करम डाल का स्वागत पारंपरिक गीत और नृत्य के साथ किया।
करम पर्व की परंपरा के अनुसार करम डाल को विधिवत रूप से लाकर अखाड़ा में स्थापित किया जाता है। इसके बाद करम डाल की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान करम देवता की कथा सुनाई जाती है। मान्यता है कि करम देवता की पूजा से परिवार में सुख-समृद्धि, खुशहाली और भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम बना रहता है। पर्व के दौरान बहनें अपने भाइयों की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं, जबकि भाई भी बहनों के प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का भाव व्यक्त करते हैं।
पूजा-अर्चना के बाद अखाड़ों में पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का दौर शुरू होता है। युवक-युवतियां, महिला-पुरुष सामूहिक रूप से मांदर और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर नृत्य करते हैं। करम डाल के चारों ओर रातभर पारंपरिक गीत और नृत्य करने की परंपरा है। इस दौरान नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक रीति-रिवाजों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
चाईबासा के उरांव समाज के सात अखाड़ों के साथ-साथ मुंडा समाज और अन्य समुदायों के लोग भी करम पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। अलग-अलग समुदायों में पर्व मनाने की विधि में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन प्रकृति के प्रति सम्मान, सामाजिक एकता और भाई-बहन के प्रेम की भावना इस पर्व से जुड़ी हुई है।
करम पर्व के अवसर पर शहर के विभिन्न अखाड़ों में देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक नृत्य-गीत का आयोजन जारी रहेगा। पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और पूरा वातावरण पारंपरिक संस्कृति के रंग में रंगा हुआ है।

