संत का अपमान भागवत प्राप्ति के मार्ग में बाधा डालता है: हिमांशु महाराज
जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को कथा व्यास हिमांशु महाराज ने परीक्षित जन्म, कपिल अवतार और शिव-पार्वती विवाह की महिमा का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और भगवान की शरणागति का महत्व समझाया।
हिमांशु महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में राजा परीक्षित के जन्म और भगवान कपिल के अवतार की कथा का विशेष महत्व है। परीक्षित जन्म का प्रसंग जहां भगवान की कृपा और शरणागति की महिमा को दर्शाता है, वहीं कपिल अवतार मनुष्य को विवेक, वैराग्य और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए जीवन का महत्व समझते हुए अधिक से अधिक समय भगवान की भक्ति और सत्संग में लगाना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संतों और महात्माओं के प्रति सम्मान का भाव रखने की सीख देते हुए कहा कि किसी भी संत का अपमान नहीं करना चाहिए। संत का अपमान भागवत प्राप्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि भागवत के प्रमुख श्रोता राजा परीक्षित थे, जिन्हें श्राप के कारण श्री सुखदेवजी ने सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण कराया। कथा श्रवण से राजा परीक्षित का आध्यात्मिक उत्थान हुआ।
कपिल अवतार की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु ने कपिल मुनि के रूप में अवतार लिया था। भगवान उसी हृदय में वास करते हैं, जिसका मन गंगा की तरह निर्मल और पवित्र हो।
कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया। हिमांशु महाराज ने बताया कि दक्ष प्रजापति और भगवान शिव के बीच वैमनस्य के कारण सती ने अपने पिता के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होते देख अपना शरीर त्याग दिया था। अगले जन्म में सती ने पार्वती के रूप में जन्म लिया और बाद में भगवान शिव से उनका विवाह हुआ। उन्होंने कहा कि शिव और पार्वती का स्वरूप श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। भगवान की प्राप्ति श्रद्धा और विश्वास के माध्यम से ही होती है।
उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से समाज को संदेश देते हुए कहा कि जहां सम्मान न हो, वहां व्यक्ति को जाने से बचना चाहिए। जीवन में श्रद्धा, विश्वास और अच्छे संस्कारों को अपनाकर ही आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
कथा के दूसरे दिन अमित, सुमित, सुभाष मुनका, ओम, जीतू, पवन और प्रदीप यजमान के रूप में उपस्थित रहे। वहीं विश्वनाथ नरेड़ी, छितरमल धूत, अमित, सुमित, ओम, जीतू, नवल आगीवाल, अशोक नरेड़ी, अनिल और सुनील की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई।
कथा के तीसरे दिन गुरुवार को ध्रुव चरित्र और नरसिंह अवतार की कथा सुनाई जाएगी। वहीं चौथे दिन शुक्रवार को कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग श्रद्धालुओं को सुनाया जाएगा।
इस अवसर पर सुरेश कुमार अगीवाल, हरि शंकर सोंथालिया, श्याम सुंदर नागेलिया, अशोक नरेड़ी, सत्यनारायण नरेड़ी, अशोक संघी, सीताराम अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भागवत कथा का आनंद लिया।

