गुवा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा स्थित सेल की रांजाबुरु खदान में स्थानीय रोजगार, प्रभावित गांवों के विकास और पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू कराने की मांग को लेकर पिछले 22 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। प्रशासन की ओर से मांगों पर पहल करने और ग्रामीणों की अधिकारियों तथा सेल प्रबंधन के साथ वार्ता कराने के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने यह निर्णय लिया। आंदोलन स्थल पर पहुंचे जगन्नाथपुर के एसडीओ अरुण उरांव और नोवामुंडी के बीडीओ पप्पू रजक ने ग्रामीणों के साथ बातचीत की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। वार्ता के बाद अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर आंदोलन स्थगित कराया।
वार्ता के दौरान मुखिया राजू सांडिल ने ग्रामीणों की मांगों को विस्तार से प्रशासन के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से अपने अधिकारों और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने उपायुक्त और सेल प्रबंधन के साथ ग्रामीण प्रतिनिधियों की वार्ता कराने तथा समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का भरोसा दिया है। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन को 5 अक्टूबर तक का समय देने पर सहमति जताई।
ग्रामीणों के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों में मां सरला ठेका कंपनी के साथ पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू करना, रांजाबुरु खदान से प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना और स्थानीय लोगों को 75 प्रतिशत रोजगार उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा रैक लोडिंग, ट्रांसपोर्टिंग तथा खदान से जुड़े अन्य कार्यों में भी स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
बैठक में खदान से निकलने वाले कथित लाल पानी से प्रभावित गांवों की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि इससे आसपास के इलाकों में परेशानी उत्पन्न हो रही है। एसडीओ अरुण उरांव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही CSR के तहत आने वाले गांवों में शिक्षकों की कमी, पेयजल संकट और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं से भी प्रशासन को अवगत कराया गया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मंगलवार को आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि प्रशासन के आग्रह और आश्वासन पर इसे अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। यदि 5 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो ग्रामीण आगे की रणनीति तय कर आंदोलन दोबारा शुरू करने का निर्णय ले सकते हैं।
आंदोलन के दौरान लगातार बारिश के बावजूद ग्रामीण खदान क्षेत्र में डटे रहे थे। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी आंदोलन स्थल पर तिरंगा फहराकर प्रदर्शन जारी रखा गया था। मंगलवार को आंदोलन स्थगित किए जाने के दौरान मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू सांडिल, मुंडा बुधराम सिद्धू, मुंडा कुशू देवगम, मुंडा जामदेव चांपिया, मुंडा जानुम सिंह चेरोवा, मुंडा लेबेया देवगम, मुंडा राजेश टोपनो, सुमित दास और राजू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं महिलाएं मौजूद रहीं।

