रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट भवन में मंत्रियों के साथ करीब चार घंटे चली बैठक के बाद JSSC-CGL परीक्षा के साथ TDPL के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि SIT और CID की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इससे परीक्षा में अनियमितता से जुड़े बड़े नेटवर्क की आशंका भी सामने आई है। उन्होंने जांच एजेंसियों को मामले की पूरी तह तक पहुंचने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच किसी एक स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे मामले को व्यापक रूप से देखा जाएगा।
सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को भी गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि आंदोलनरत युवाओं को सरकार किसी अलग खेमे के रूप में नहीं देखती। बैठक में छात्रों की कई मांगों पर सहमति बनी है। परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए छात्र, अभिभावक और शिक्षक पोर्टल के माध्यम से अपने सुझाव भी सरकार तक पहुंचा सकेंगे।
हेमंत सोरेन ने CID की कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब जांच शुरू की गई है तो उसे पूरी तरह अंजाम तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित एसओपी का सख्ती से पालन किया जाता तो इस तरह की खामियों की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। सरकार ने परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को रोकने के लिए बनाए गए कड़े कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने का भी निर्णय लिया है।
बैठक में नए खनन कानून को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श के लिए जल्द बैठक की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर खनन कानून पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है। सरकार के इन फैसलों से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और पुरानी अनियमितताओं की पड़ताल करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

