चतरा : प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत योगीडीह उत्क्रमित मध्य विद्यालय का भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुँच चुका है। स्थिति इतनी विकराल हो गई है कि विद्यालय के बच्चों, शिक्षकों और रसोइयों में हर वक्त किसी अनहोनी का डर बना रहता है। स्कूल के कमरे क्षतिग्रस्त होने के कारण मासूम बच्चों को मजबूरीवश रसोई घर और कार्यालय कक्ष में बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। बरसात के दिनों में विद्यालय के कमरों और छत से लगातार पानी टपकता है। जर्जर छत के कभी भी ध्वस्त होने की आशंका बनी रहती है। इसी भय के माहौल में रसोइया जान जोखिम में डालकर बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन पकाने को मजबूर हैं।
रसोई कर्मचारी ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि, “खाना बनाते समय हर पल डर लगा रहता है कि कहीं छत का प्लास्टर या कंक्रीट ऊपर से न गिर जाए।”
वहीं विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दिनेश यादव ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय भवन की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए गए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है और अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्यामलाल दास ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि भवन के अभाव में पठन-पाठन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने वरीय अधिकारियों से मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए जल्द से जल्द नए भवन निर्माण की स्वीकृति देने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या वक्त रहते इन मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे?

