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Wed. Jul 22nd, 2026

जंगली हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत, वन विभाग और बिजली व्यवस्था पर उठे सवाल

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत तोन्ड़ागहातु पंचायत के बुड़ाकमान गांव में मंगलवार देर रात जंगली हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई। मृतक की पहचान चंद्र मोहन सिंकु के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 12:30 बजे गांव में जंगली हाथी के प्रवेश की सूचना मिलने पर ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान चंद्र मोहन सिंकु हाथी को देखने के लिए घर से कुछ दूरी तक निकल गए। तभी अचानक उनका सामना एक दंतैल हाथी से हो गया। हाथी ने उन पर हमला कर दिया और पैरों से कुचल दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मदद से घायल चंद्र मोहन सिंकु को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जगन्नाथपुर पहुंचाने की व्यवस्था कराई। बताया गया कि अस्पताल ले जाने के दौरान घायल ने पानी मांगा, जिसके बाद उन्हें पानी पिलाया गया। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद मानसिंह तिरिया ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने चाईबासा रेंजर, नोआमुंडी फॉरेस्टर तथा क्षेत्रीय वनरक्षक (गार्ड) से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। उन्होंने इसे वन विभाग की गंभीर लापरवाही बताया और कहा कि ऐसी घटनाओं में विभागीय अधिकारियों का तत्काल सक्रिय होना आवश्यक है।

मानसिंह तिरिया ने यह भी कहा कि घटना के समय गांव में बिजली आपूर्ति बाधित थी। यदि उस समय बिजली रहती तो हाथी की मौजूदगी का पहले ही पता चल सकता था और ग्रामीण सतर्क हो जाते। उनका कहना है कि समय पर विद्युत आपूर्ति होने से इस तरह की घटना को टाला जा सकता था। उन्होंने बिजली विभाग की भूमिका की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही भविष्य में और बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।

उन्होंने प्रशासन से मृतक चंद्र मोहन सिंकु के परिजनों को शीघ्र सरकारी मुआवजा, वन विभाग से निर्धारित सहायता राशि तथा अन्य आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोगों ने क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग से नियमित निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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