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गोईलकेरा में अवैध बालू कारोबार की उच्चस्तरीय जांच की मांग, रामहरि गोप ने दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

चाईबासा: एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष रामहरि गोप ने गोईलकेरा थाना क्षेत्र में अवैध बालू परिवहन और कथित अवैध वसूली के मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

रामहरि गोप ने कहा कि 12 जुलाई की रात गोईलकेरा पुलिस द्वारा अवैध बालू लदे चार ट्रैक्टरों को पकड़े जाने के बाद उन्हें विधिसम्मत कार्रवाई किए बिना कथित रूप से आर्थिक लेन-देन के बाद छोड़ दिए जाने की सूचना बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि बिना प्राथमिकी दर्ज किए, बिना वाहन जब्त किए और बिना खनन विभाग को सुपुर्द किए ट्रैक्टरों को छोड़ा गया है, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं बल्कि सरकारी राजस्व की क्षति और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में प्रकाशित समाचारों में गोईलकेरा क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध बालू ढुलाई की बात सामने आई है। यदि यह सही है तो यह सवाल उठता है कि स्थानीय प्रशासन, खनन विभाग और खनन टास्क फोर्स अब तक क्या कर रही थी। उनके अनुसार अवैध खनन लंबे समय से चल रहा प्रतीत होता है और इसकी व्यापक जांच जरूरी है।

रामहरि गोप ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। यदि छोटे मामलों में आम लोगों पर कार्रवाई होती है तो अवैध खनन और सरकारी राजस्व की चोरी जैसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ भी समान रूप से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे लोगों का कानून और प्रशासन पर विश्वास बना रहेगा।

उन्होंने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट स्तर या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने, गोईलकेरा थाना के संबंधित पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका की जांच करने, घटना की रात की जीडी, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और अन्य अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को वर्तमान दायित्व से अलग रखने पर भी विचार करने को कहा है।

रामहरि गोप ने अवैध बालू परिवहन से जुड़े वाहन मालिकों, संचालकों और संरक्षण देने वाले लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने, कोयल नदी एवं अन्य घाटों पर हो रहे अवैध खनन की जांच कराने, खनन टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने तथा सरकारी राजस्व की क्षति का आकलन कर दोषियों से वसूली सुनिश्चित करने की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल चार ट्रैक्टरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, पुलिस की विश्वसनीयता, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और कानून के शासन से जुड़ा विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

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