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Wed. Jul 1st, 2026

एसीसी सीमेंट प्लांट बचाने की मांग को लेकर झींकपानी से चाईबासा तक निकली महापदयात्रा

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित एसीसी सीमेंट प्लांट को बंद किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ बुधवार को क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन देखने को मिला। एसएससी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में झींकपानी से चाईबासा तक महापदयात्रा निकाली गई, जिसमें फैक्ट्री कर्मियों, ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों, छोटे कारोबारियों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर उद्योग को बचाने की मांग उठाई।

महापदयात्रा की शुरुआत एसीसी सीमेंट प्लांट के मुख्य द्वार से हुई। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी पूरे रास्ते कारखाना बंद करने के फैसले के विरोध में नारे लगाते हुए चाईबासा पहुंचे। आंदोलन का नेतृत्व समिति के संयोजक संजय बालमुचू ने किया। प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी करते हुए राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

आंदोलनकारियों का कहना है कि लगभग आठ दशक पुराने इस सीमेंट संयंत्र को 16 अगस्त से स्थायी रूप से बंद करने का नोटिस जारी किया गया है। उनका आरोप है कि यदि यह निर्णय लागू हुआ तो केवल कंपनी के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि पूरे झींकपानी और टोंटो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि प्लांट से प्रत्यक्ष रूप से करीब 1,600 श्रमिक परिवार जुड़े हुए हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से परिवहन, छोटे व्यापार, सब्जी बिक्री, होटल, किराना और अन्य व्यवसायों से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका इसी उद्योग पर निर्भर है। ऐसे में फैक्ट्री बंद होने से क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ने के साथ-साथ पलायन की समस्या भी गहरा सकती है।

महापदयात्रा से पूर्व संघर्ष समिति ने आसपास के गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया था। इसी का परिणाम रहा कि विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय नागरिक पदयात्रा में शामिल हुए और उद्योग को बचाने के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाई।

प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की कि एसीसी सीमेंट प्लांट को बंद होने से रोकने के लिए कंपनी प्रबंधन के साथ वार्ता कर समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि यह उद्योग केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की आधारशिला है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और कंपनी प्रबंधन ने समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार श्रमिकों और स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करेगी।

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