Breaking
Tue. Jun 9th, 2026

25वीं उर्स-ए-क़ायद-ए-अहले सुन्नत ‘सिल्वर जुबली’ को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी, जमशेदपुर में हुई उच्च स्तरीय बैठक

जमशेदपुर। क़ायद-ए-अहले सुन्नत हज़रत अल्लामा अरशदुल कादरी (अलैहिर्रहमा) के विसाल के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इस वर्ष आयोजित होने वाली 25वीं उर्स-ए-क़ायद-ए-अहले सुन्नत को “सिल्वर जुबली” के रूप में मनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने और अपने मोहसिन व मुरब्बी के प्रति अक़ीदत, मोहब्बत और सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से मंगलवार की शाम जामिया फ़ैज़-उल-उलूम, जमशेदपुर में एक महत्वपूर्ण एवं उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता मरकज़ी उर्स कमेटी के संरक्षक हज़रत अल्लामा गुलाम रसूल बलयावी साहब, अध्यक्ष बिहार अल्पसंख्यक आयोग ने की। बैठक में उलेमा, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उर्स कमेटी के सदस्यों ने भाग लिया। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 25वीं उर्स-ए-क़ायद-ए-अहले सुन्नत को धार्मिक, शैक्षणिक, शोधपरक और संगठनात्मक दृष्टि से ऐतिहासिक स्वरूप दिया जाएगा।

बैठक में यह तय किया गया कि अहले सुन्नत व जमाअत के बीच एकता, भाईचारा और आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए देश की प्रतिष्ठित खानक़ाहों के सज्जादानशीनों, प्रमुख धार्मिक संस्थानों के जिम्मेदारों तथा विभिन्न शैक्षणिक संगठनों के प्रतिनिधियों की एक भव्य सभा आयोजित की जाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य विचारों के आदान-प्रदान के साथ-साथ समाज में सकारात्मक संदेश देना होगा।

साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में हर वर्ष क़ायद-ए-अहले सुन्नत के उर्स को “यौम-ए-तहरीक” के रूप में मनाया जाएगा, ताकि अल्लामा अरशदुल कादरी के मिशन, विचारधारा और सेवाओं को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

उर्स के तहत 27 जुलाई 2026 को छात्रों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर किराअत, नात, तकरीर और तहरीर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। वहीं 28 जुलाई को कादरी बुक फेयर का उद्घाटन होगा तथा रस्म-ए-परचम कुशाई संपन्न होगी। इसी दिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक एक भव्य ऑल इंडिया सेमिनार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के विद्वान, शोधकर्ता और बुद्धिजीवी अल्लामा अरशदुल कादरी की शैक्षणिक, दअवती और सामाजिक सेवाओं पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।

29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर का नातिया मुशायरा आयोजित होगा, जिसमें भारत सहित विभिन्न देशों के प्रसिद्ध शायर और नातख्वां शिरकत करेंगे। 30 जुलाई को कुल शरीफ का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा रात में तकरीरी जलसा होगा तथा मदरसा से फारिग होने वाले छात्रों की दस्तारबंदी कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। मदरसा के पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को भी विशेष इजाजी ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अल्लामा अरशदुल कादरी ने अहले सुन्नत व जमाअत के विचारों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक महान इस्लामी चिंतक, लेखक, शिक्षाविद और दावत-ए-दीन के सशक्त प्रतिनिधि थे। उन्होंने अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए इराक, ईरान, ब्रिटेन, हॉलैंड और नेपाल सहित अनेक देशों की यात्राएं कीं तथा वहां इस्लामी शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और धार्मिक समन्वय के लिए उल्लेखनीय कार्य किया।

वक्ताओं ने कहा कि अल्लामा अरशदुल कादरी की शैक्षणिक और दअवती सेवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनके विचार, लेखन और संस्थागत योगदान को संरक्षित और प्रचारित करने के उद्देश्य से इस सिल्वर जुबली उर्स को विशेष स्वरूप दिया जा रहा है। आयोजन समिति ने देशभर के उलेमा, बुद्धिजीवियों, छात्रों और अकीदतमंदों से इस ऐतिहासिक समारोह में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

Related Post