रांची: नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर मानवाधिकार संरक्षण, महिला सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, जेल सुधार और सुशासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में मानवाधिकार व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने के लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के झारखंड प्रदेश उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह ने किया। उनके साथ राष्ट्रीय संयुक्त सचिव विनय चंद्रा, पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष धनंजय शर्मा, जिला उपाध्यक्ष सुमित शर्मा तथा जिला महासचिव मानस पॉल मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को बताया कि NHRCCB वर्ष 2017 से देशभर में मानवाधिकार संरक्षण, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल अधिकारों की सुरक्षा, विधिक जागरूकता और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। संगठन के हजारों सदस्य और स्वयंसेवक विभिन्न राज्यों में जनजागरूकता अभियान, संगोष्ठी, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को अवगत कराया कि संगठन द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशनों के माध्यम से मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण के लिए संस्थागत व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
ज्ञापन में झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग को पूर्ण रूप से सक्रिय और सशक्त बनाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और आयोग को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। साथ ही महिलाओं, बच्चों, आदिवासियों, अनुसूचित जाति एवं अन्य वंचित वर्गों से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध और मानव तस्करी के मामलों पर भी प्रतिनिधिमंडल ने चिंता जताई। उन्होंने होटवार केंद्रीय कारागार से जुड़े महिला उत्पीड़न मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा राज्य की जेलों में महिला सुरक्षा मानकों की समीक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
जेल सुधार के संदर्भ में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सभी कारागारों में जेल मैनुअल का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बंदियों को स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छ वातावरण और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ जेलों का नियमित मानवाधिकार निरीक्षण कराया जाना आवश्यक है।
संगठन ने पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से थाना स्तर पर नियमित पुलिस-जन संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में नागरिकों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ज्ञापन में साइबर अपराध, नशा तस्करी, मानव तस्करी और संगठित अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की भी मांग की गई। साथ ही युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित करने का सुझाव दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने खनन और औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रभावित लोगों को न्यायसंगत मुआवजा, रोजगार और प्रभावी पुनर्वास उपलब्ध कराने के लिए सुदृढ़ निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई।
शिक्षा के क्षेत्र में संगठन ने राज्य के विश्वविद्यालयों में मानवाधिकार विभाग स्थापित करने, मानवाधिकार विषय में विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू करने तथा प्रत्येक विश्वविद्यालय में मानवाधिकार सेल गठित करने का सुझाव दिया। इसके अलावा प्रत्येक जिले में जिला मानवाधिकार संरक्षण प्रकोष्ठ की स्थापना की मांग भी रखी गई, ताकि स्थानीय स्तर पर शिकायतों का त्वरित समाधान और जागरूकता कार्यक्रमों का बेहतर संचालन हो सके।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मानवाधिकार लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की आधारशिला हैं तथा संगठन राज्य सरकार और विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर इस दिशा में रचनात्मक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और ज्ञापन में उठाए गए विषयों को संबंधित विभागों के समक्ष विचारार्थ भेजने तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया।

