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कोल्हान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को बड़ी सफलता, एआई आधारित ब्लड शुगर जांच उपकरण का मिला पेटेंट

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग से जुड़े शोधकर्ता शोवित रंजन और उनकी टीम द्वारा विकसित एआई आधारित ब्लड शुगर टेस्ट डिवाइस को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिज़ाइन पेटेंट प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण माना जा रहा है।

भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा यह पेटेंट डिज़ाइन एक्ट, 2000 तथा डिज़ाइन नियमावली, 2001 के प्रावधानों के तहत स्वीकृत किया गया है। इस स्वीकृति के साथ यह प्रमाणित हो गया है कि शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह उपकरण अपने डिजाइन और अवधारणा के स्तर पर एक विशिष्ट और नवीन तकनीकी उत्पाद है। स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ावा देने वाली यह तकनीक भविष्य में मधुमेह रोगियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

इस शोध एवं नवाचार परियोजना में शोवित रंजन के साथ बेन सुजीथा बी., चंद्रकांत हट्टी, शनमुघा प्रिया आर. के., आर. एस. आर. थेनमोझी, राहुल वर्मा, रमेश दहल और लोकेन्द्र बहादुर कठायत सहित कई शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम के संयुक्त प्रयासों और लंबे शोध कार्य के बाद इस उपकरण का विकास संभव हो पाया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह डिवाइस कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक पर कार्य करता है और इसका उद्देश्य ब्लड शुगर जांच को अधिक सरल, सटीक और प्रभावी बनाना है। एआई की सहायता से यह उपकरण रक्त में शर्करा के स्तर का तेजी से विश्लेषण करने में सक्षम है। स्वास्थ्य तकनीक और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में इसे एक संभावनाशील नवाचार माना जा रहा है, जो भविष्य में जांच प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बना सकता है।

इस उपलब्धि पर कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति अंजिला गुप्ता ने शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय में अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने वाली है। उन्होंने कहा कि शोवित रंजन और उनकी टीम का यह कार्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा तथा उन्हें नए शोध कार्यों के लिए प्रोत्साहित करेगा।

वहीं, पेटेंट मिलने पर शोवित रंजन और उनकी टीम ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उन्हें समाजोपयोगी तकनीकों के विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में नए शोध कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में इस तरह के नवाचार आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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