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Fri. May 22nd, 2026

कुत्ते के काटने के बाद झाड़-फूंक पड़ा भारी, युवक में दिखे रेबीज के खतरनाक लक्षण

गुमला: जिले में अंधविश्वास और लापरवाही का एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। कुत्ते के काटने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से एक युवक की हालत इतनी गंभीर हो गई कि वह लोगों को देखकर कुत्तों की तरह भौंकने लगा और पानी देखते ही डरकर चीखने लगा। डॉक्टरों ने उसमें रेबीज संक्रमण के गंभीर लक्षण पाए हैं और उसे बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स रेफर किया गया है।

जानकारी के अनुसार चैनपुर थाना क्षेत्र के बरवे नगर मुंडाटोली गांव निवासी 27 वर्षीय गुलशन लोहार 16 मई को अपने मालिक विकास कुमार के साथ जारी थाना क्षेत्र के भिखमपुर गांव मजदूरी करने गया था। वहां वाहन में अनाज की बोरियां लोड करने के दौरान एक कुत्ते ने उसके हाथ में काट लिया। घटना के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाकर एंटी रेबीज इंजेक्शन दिलाने के बजाय परिजन झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी के सहारे इलाज कराते रहे। इस दौरान युवक सामान्य जीवन जीता रहा और शराब का सेवन भी करता रहा।

कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। पहले बेचैनी और घबराहट हुई, फिर उसका व्यवहार असामान्य हो गया। परिजनों ने बताया कि युवक अचानक लोगों को देखकर भौंकने लगता था और गुस्से में उन्हें काटने के लिए दौड़ पड़ता था। हालत इतनी भयावह हो गई कि परिवार वालों को उसे रस्सी से बांधकर रखना पड़ा। पानी देखते ही वह डर जाता था और जोर-जोर से चीखने लगता था। गांव में यह खबर फैलते ही दहशत का माहौल बन गया।

बुधवार रात परिजन युवक को गुमला सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उसमें रेबीज के गंभीर लक्षण पाए। डॉक्टरों के अनुसार “हाइड्रोफोबिया” यानी पानी देखकर डरना रेबीज का बेहद खतरनाक संकेत होता है। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने तत्काल उसे रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रेफर कर दिया।

डॉक्टरों ने बताया कि कुत्ते, बंदर या किसी भी संक्रमित जानवर के काटने के बाद तुरंत एंटी रेबीज वैक्सीन लेना जरूरी होता है। इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मामलों में झाड़-फूंक या देसी इलाज के भरोसे न रहें और तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सा कराएं।

इस घटना में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही भी सामने आई। रिम्स रेफर किए जाने के बाद परिजन करीब दो घंटे तक 108 एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। बाद में रात करीब 10 बजे निजी वाहन की व्यवस्था कर युवक को रांची ले जाया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अंधविश्वास और जागरूकता की कमी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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