जमशेदपुर। आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से मंगलवार को गदरा आनंद मार्ग जागृति में आयोजित महिला स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर के दौरान एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। गदरा और गोविंदपुर क्षेत्र की मुख्य सड़कों पर निकली इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। “बाबा नाम केवलम” कीर्तन की मधुर धुन के साथ महिलाओं ने सामाजिक समरसता, विश्व बंधुत्व और मानव एकता के पक्ष में जोरदार नारे लगाए।
शोभायात्रा के दौरान “दुनिया के नैतिकवादियो एक हो”, “विश्व बंधुत्व कायम हो”, “जात-पात की करो विदाई, आपस में हैं भाई-भाई” और “एक चूल्हा, एक चौका, एक है मानव समाज” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। यात्रा का उद्देश्य समाज में भाईचारा, समानता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश फैलाना बताया गया।
प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए आनंद मार्ग की महिला सन्यासिनियों अवधूतिका आनंदनिष्ठा आचार्या, अवधूतिका आनंदनम्रता आचार्या एवं अवधूतिका आनंद सहिष्णुता आचार्या ने कहा कि अध्यात्म विहीन शिक्षा कभी भी पूर्ण नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा आध्यात्मिकता में निहित है, लेकिन आधुनिक भोगवादी संस्कृति के प्रभाव ने समाज की नैतिक और सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर किया है। इसके कारण युवा पीढ़ी और बच्चे भटकाव की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हर मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का समान अधिकार मिलना चाहिए तथा समाज का दायित्व है कि वह इन अधिकारों की रक्षा करे। वक्ताओं ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से बुरा नहीं होता, बल्कि सही दिशा और संस्कारों के अभाव में वह गलत मार्ग पर चला जाता है। यदि उसकी नकारात्मक प्रवृत्तियों को सकारात्मक दिशा दी जाए तो वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।
सन्यासिनियों ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को अत्यधिक भौतिकवादी बताते हुए कहा कि आज समाज को नव्य मानवतावादी और ईश्वर केंद्रित शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। ऐसी शिक्षा व्यवस्था ही नैतिकता, आध्यात्मिकता और मानवता के मूल्यों को मजबूत कर सकती है तथा विश्व बंधुत्व और समानता पर आधारित समाज की स्थापना संभव बना सकती है।

