जमशेदपुर। मंगलवार को टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की ओर से राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा सप्ताह के तहत एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों को आपदा प्रबंधन, अग्निशमन और प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर के सभागार में आयोजित हुआ, जहां सुरक्षा और सतर्कता को लेकर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार के संबोधन से हुई। उन्होंने उपस्थित रेल कर्मियों को सेवा, सुरक्षा और समर्पण के मूल मंत्र के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि रेलवे जैसी संवेदनशील सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए, विशेषकर आगजनी या अन्य आपदाओं की स्थिति में त्वरित और सही निर्णय लेना अत्यंत आवश्यक है। इसके बाद सभी प्रतिभागियों को आपदा के समय जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने की शपथ दिलाई गई।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान अग्निशमन यंत्रों के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग की बारीकियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग करते समय किन सावधानियों का पालन करना चाहिए। विशेष रूप से यह समझाया गया कि यदि पाउडर बाहर नहीं निकल रहा हो तो संयंत्र को सावधानीपूर्वक लिटाकर इस्तेमाल करना चाहिए और उसकी कैप हमेशा कठोर सतह की ओर रखनी चाहिए, ताकि किसी संभावित विस्फोट से बचा जा सके।
डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से ड्राई केमिकल पाउडर और कार्बन डाइऑक्साइड आधारित अग्निशमन यंत्रों के उपयोग का मॉक ड्रिल कराया। इस दौरान प्रतिभागियों को आग बुझाने के सही तरीके, विभिन्न प्रकार की आग की पहचान और उनके अनुसार उपयुक्त यंत्र के चयन की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया गया, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों की बेहतर समझ मिल सके।
इसके अलावा प्राथमिक चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया। सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) की विधि, गले में विदेशी वस्तु फंसने की स्थिति (एफबीएओ) में तत्काल राहत देने की तकनीक और अन्य जरूरी प्राथमिक उपचार के उपायों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि दुर्घटना के शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और सही प्राथमिक उपचार से कई जानें बचाई जा सकती हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, रांची, आद्रा, खड़गपुर, संतरागाछी, बोकारो और राउरकेला मंडल से आए कुल 240 लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस तरह के प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

