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वन विभाग की लापरवाही ड्रोन कैमरा भी फेल

वन विभाग की लापरवाही ड्रोन कैमरा भी फेल

 

बालूमाथ कौशर अली की रिपोर्ट

हाथी कि मौत के 36 घंटे के बाद विभाग को पता चलने व दोनों दांत गायब होने को लेकर प्रखंड क्षेत्र में बना चर्चा का विषय

 

 

बालूमाथ : बारियातु प्रखंड के साल्वे पंचायत अंतर्गत रेंची गाँव स्थित अमाटोंगरी व ढोठामाड़र जंगल में बीते शनिवार कि रात्रि बिमार हाथी कि हुई मौत के बाद हाथी के दोनों दांत गायब होने पर प्रखंड क्षेत्र में दबी जबानों से हाथी कि आकस्मिक मौत या हत्या पर चर्चा गरम है। प्रखंड के रेंची ग्राम स्थित अमाटोंगरी जंगल में बीते दो जुलाई से हाथीयों का झुंड से बिछड़ा एक हाथी उक्त जंगल में रह रहा था आठ जुलाई को ग्रामीणों ने एक अकेला हाथी को गड्ढे का पानी पिता व लड़खड़ा कर चलता देख फोटो तथा विडियो बना कर सोशलमीडिया पर वायरल कर दिया जिसके बाद विभाग के लोग 13 जुलाई को ड्रोन कैमरा के साथ पहुंचे और हाथी का लोकेशन लेकर रिपोर्ट कार्यालय को सौंपा जिसके बाद 18 जुलाई को लातेहार डीएफओ रौशन कुमार ने रांची के हाथी स्पेशलिस्ट डॉक्टर राकेश जो जो, पलामू टाइगर के एआईजी शशि शंकर, मेदनिनगर से वनरक्षक कुमार आशिस सहित कई अधिकारी पहुंच कर हाथी को कड़ी मशक्कत के बाद करीब से कैमरा के माध्यम से देखा और लक्षण के अनुसार पाया कि पैर में दर्द है जिसका दवा कटहल, खिचड़ी, केला के पत्ता आदि में देना प्रारंभ किय साथ ही साथ हाथी को देख रेख व समय समय पर दवा, भोजन के लिए बारियातु वन क्षेत्र के वनरक्षी अभय भगत व पिंटू कुमार को नियुक्ति किया गया था दोनों वनरक्षी समय समय पर भोजन व दवा देते हुए संपुर्ण निगरानी रखने का दावा कर रहे थे पर ग्रामीणों के माने तो हाथी कि से निकल कर भाग स्थिति दिन प्रतिदिन नाजुक होता जा रहा था जिस की सुचना पाकर 21 जुलाई को डीएफओ रौशन कुमार व राज्य के हाथी विशेषज्ञ डॉक्टर अजय कुमार हाथी के समुचित इलाज के लिए पहुंचे जहां ड्रोन कैमरा कि मदद से हाथी के लोकेशन लिया और पत्रकारों को बताया था कि हाथी के पिछले हिस्से के बाएं पैर के घुटने में आंशिक चोट होने का अंदेशा है जिस कारण वह पुरी तरह पैर को उठा कर नहीं चल पा रहा है। दवा बदली गई है एक सप्ताह के अंदर हाथी पुरी तरह स्वास्थ्य हो जाएगा। पहले कि तुलना हाथी कि स्थित अच्छी है। वहीं दोनों नियुक्त कमीयो को पुरी ध्यान रखने की बात कहा गया था कि हाथी जंगल जाए। प्रतिदिन हाथी चार से पांच किलोमीटर चल रहा है पर अचानक इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद हाथी कि हुई मौत के 36 घंटे के बाद निगरानी कर रहे वनरक्षी भगत को पता चला और हाथी के शरीर से दोनों दांत गायब था जिस कारण पुरे क्षेत्र में कई तरह कि बात सामने आ रही है कोई कहता है कि स्वास्थ्य हो चुका हाथी कि अचानक मौत हुई या दांत कि तसकरी करने के लिए मार दिया गया। यह एक प्रश्न चिन्ह बन गया है। लोग पोस्टमार्टम रिपोर्ट व हाथी के दोनों दांत मिलने कि खबर का इंतेजार में हैं।

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