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लातेहार वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से उजड़ रहा है वन। लातेहार वन प्रमण्डल अंतर्गत जोबांग थाना के खरचा वन क्षेत्र का मामला।

लातेहार वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से उजड़ रहा है वन।

 

 

 

लातेहार वन प्रमण्डल अंतर्गत जोबांग थाना के खरचा वन क्षेत्र का मामला।

 

 

 

 

किस्को/लोहरदगा। लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत जोबांग थाना क्षेत्र में इन दिनों लकड़ी माफियाओं का मनोबल लातेहार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों के मिलीभगत से सातवें आसमान पर चढ़ा हुआ है। आए दिन लातेहार वन प्रमंडल क्षेत्र के जोबांग थाना क्षेत्र अंतर्गत खरचा वन क्षेत्र से कीमती एवं इमारती लकड़ी को लकड़ी माफियाओं ने रीचुघुटा लोहरदगा मुख्य पथ पर बेखौफ होकर वन विभाग को चुनौती देते हुए बोटा बनाने का काम निर्भीक होकर करते हैं। परंतु ऐसे लकड़ी माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने में लातेहार वन विभाग की टीम अब तक नाकाम साबित हुई है। गौरतलब हो कि लोहरदगा एवं लातेहार सीमाना पर स्थित जोबांग थाना क्षेत्र के खरचा वन क्षेत्र लातेहार वन प्रमंडल क्षेत्र में स्थित है।इस संदर्भ में क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लातेहार वन विभाग की टीम क्षेत्र भ्रमण करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती है यही वजह है कि आए दिन लकड़ी माफियाओं का क्षेत्र से कीमती एवं इमारती लकड़ियों का धड़ल्ले से कटाई कर ले जाने में किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं होती है। क्षेत्र के लोगों का कहना है

कि लातेहार वन प्रमंडल अंतर्गत खरचा वन क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों के द्वारा क्षेत्र भ्रमण नहीं किए जाने से लकड़ी माफियाओं के द्वारा बेखौफ होकर जंगल को उजाड़ने का काम प्रति दिन किया जाता है। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों लातेहार जिले के होसिर पतरातु निवासी कृष्णा लोहरा का पुत्र मुकेश लोहरा लातेहार वन प्रमण्डल क्षेत्र अंतर्गत खरचा वन क्षेत्र के मसुरियाखाड़ पुलिस पिकेट से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर स्थित बड़ा पुल के समीप रीचुघुटा किस्को मुख्य पथ के बगल पर साल की कीमती इमारती लकड़ी को काटकर बेख़ौफ होकर बोटा बनाने का काम कर दिखाया लेकिन वन विभाग की टीम ऐसे लकड़ी तस्कर के विरुद्ध कार्रवाई करने में किसी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं दिखा पाई है जिससे क्षेत्र के लोगों में लातेहार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों के प्रति नाराजगी बना हुआ है। मामले को ले लातेहार वन प्रमण्डल पदाधिकारी से दूरभाष पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया गया लेकिन डीएफओ का संपर्क नंबर सेवा में नहीं रहने से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया।

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