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गारू प्रखंड में सरहुल को लेकर हजारों की भीड़ पर नहीं मना सरहुल

*गारू प्रखंड में सरहुल को लेकर हजारों की भीड़ पर नहीं मना सरहुल*

गारू संवाददाता उमेश यादव की रिपोर्ट

सरहुल का सीधा मतलब पेड़ पौधा या कहें तो संपूर्ण प्रकृति की पूजा करना है। प्रकृति के काफी करीब रहने के कारण उरांव, खरवार, कोरवा, बृजिया तथा मुंडा जनजाति के लोग इस त्योहार को बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। झारखण्ड का राजकीय पर्व सरहुल के अवसर पर लगभग राज्य के सभी सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय में छुट्टी रहती है। अब बात गारू प्रखंड की करते हैं। आदिवसी बहुल प्रखंड गारू लगभग 70 फीसदी खरवार, उरांव व अन्य समुदाय के लोग निवास करते हैं। बात चित में ग्रामीणों नें बताया कि, शायद यह पहला अवसर ही है कि गारू प्रखंड में प्रकृति के महापर्व तथा राजकीय पर्व सरहुल नहीं मनाया गया। वैसे नेता तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि को शर्म आना चाहिए जो आदिवासी की सभ्यता और संस्कृति के नाम पर राजनीती करते हैं। सैकड़ों ऑटो तथा सवारी गाड़ियां से सुदूरवर्ती क्षेत्र से लोग प्रखंड मुख्यालय सरहुल की मेला देखने के नाम पर पहुँचे। सरहुल नहीं मनाने से ग्रामीण काफी नाराज दिखे।

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