जमशेदपुर। सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर में सोमवार से ई-कचरा (ई-वेस्ट) रिसाइक्लिंग पर मास्टर ट्रेनर्स के लिए एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इस पहल का उद्देश्य ई-कचरा प्रबंधन से जुड़े असंगठित क्षेत्र के कामगारों को वैज्ञानिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों से जोड़ते हुए उन्हें संगठित व्यवस्था का हिस्सा बनाना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने किया। इस अवसर पर मुख्य वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रमुख डॉ. मनीष कुमार झा, एमईआर प्रमुख डॉ. संजय कुमार, आरपीबीडी प्रमुख डॉ. एस.के. पाल सहित संस्थान के वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता मौजूद रहे। प्रशिक्षण में टीईआरआई के मास्टर ट्रेनर्स डॉ. अलक डेका, अंकित कुमार रथ, जॉर्ज मैथ्यू, नीलिमा टी, श्वेता गौतम और रविकिरण शेट तथा रेकार्ट (REKART) के प्रशिक्षक सत्यम नेहरा, शंकर ठाकुर, अंशिका गुप्ता, लखन सिंह, रमन कुमार और रोहित गर्ग भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, बैटरी, तार और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले ई-कचरे की पहचान, छंटाई, सुरक्षित हैंडलिंग और रिसाइक्लिंग की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। डॉ. मनीष कुमार झा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम प्रतिभागियों को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड से कॉपर, एल्युमिनियम, सिल्वर और गोल्ड जैसी मूल्यवान धातुओं की रिकवरी की तकनीक सिखाएगी।
यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सी-मेट (हैदराबाद), सीएसआईआर-एनएमएल (जमशेदपुर) और सीआईपीईटी-एलएआरपीएम (भुवनेश्वर) संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। परियोजना के तहत देशभर में 15,000 असंगठित कामगारों को प्रशिक्षित करने, 50 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने, 75 ई-कचरा क्लस्टर विकसित करने तथा 30 एमएसएमई आधारित संगठित क्लस्टर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
विशेषज्ञों ने कहा कि ई-कचरा केवल कचरा नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण द्वितीयक संसाधन है। वैज्ञानिक रिसाइक्लिंग के माध्यम से न केवल पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सकता है, बल्कि रोजगार सृजन, संसाधन दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। यह कार्यक्रम भारत में टिकाऊ ई-कचरा प्रबंधन और हरित औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

