चाईबासा: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम में वर्ष 1946 में स्थापित और वर्ष 2003 में पुनः निर्माण के बाद आधुनिक रूप में संचालित हुआ चाईबासा एसीसी प्लांट आज बंदी की स्थिति में पहुंच गया है। कभी हजारों लोगों की रोजी-रोटी का सहारा रहा यह प्लांट अब स्थानीय लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है।
जानकारी के अनुसार, शुरुआती दौर में प्लांट में माल ढुलाई मालगाड़ी के माध्यम से होती थी। बाद में तकनीकी बदलाव के साथ कन्वेयर बेल्ट से कच्चे माल की आपूर्ति शुरू हुई। उस समय प्रतिदिन लगभग 500 से 700 अस्थायी और स्थायी कामगार यहां कार्य करते थे। प्लांट में तीन शिफ्टों में काम चलता था, जिससे आसपास के हजारों परिवारों का भरण-पोषण होता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2003 से लेकर 2020-21 तक लोज प्रक्रिया के कारण माइंस और न्यू प्लांट, दोनों धीरे-धीरे बंद हो गए। पहले यहां माइंस से पत्थर निकालकर मिलिंग और निर्माण की प्रक्रिया होती थी, लेकिन बाद में केवल बाहर से मिलिंग कर सामग्री लाकर सीमेंट उत्पादन का काम किया जाने लगा। इससे रोजगार के अवसर लगातार कम होते चले गए।
अब मई 2026 से प्लांट पूरी तरह बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है। इससे स्थानीय लोगों के बीच रोजगार को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। प्लांट से जुड़े मजदूरों के अलावा सब्जी विक्रेता, होटल संचालक, परिवहन व्यवसायी और अन्य छोटे कारोबारी भी प्रभावित होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्लांट बंद हो गया तो क्षेत्र में पलायन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जनप्रतिनिधियों से समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि चाईबासा एसीसी प्लांट केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक व्यवस्था का आधार रहा है। यदि इसे बंद होने से नहीं रोका गया तो आने वाले समय में पश्चिमी सिंहभूम जिले में बेरोजगारी और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
लोगों ने मांग की है कि सरकार प्लांट प्रबंधन के साथ बातचीत कर उत्पादन और रोजगार को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि क्षेत्र के लोगों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

