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Fri. May 15th, 2026

कौशिकी नृत्य से शरीर, मन और आत्मा का होता है विकास : आचार्या आनंदसाधिका

जमशेदपुर। गदरा स्थित आनंद मार्ग जागृति परिसर में शुक्रवार को आयोजित आनंद मार्ग प्रचारक संघ के महिला स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन कौशिकी नृत्य और योग साधना पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी की प्रतिकृति पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद मुख्य प्रशिक्षिका अवधूतिका आनंदसाधिका आचार्या ने उपस्थित महिलाओं और स्वयंसेविकाओं को कौशिकी नृत्य का अभ्यास कराया तथा उसके आध्यात्मिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि एक आदर्श शिक्षक वही हो सकता है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित एवं विकसित हो। ऐसे शिक्षक ही बच्चों को सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी द्वारा प्रतिपादित कौशिकी नृत्य शरीर की सभी ग्रंथियों और अंग-प्रत्यंगों का व्यायाम कराता है तथा मानसिक और शारीरिक रोगों को दूर करने में सहायक माना जाता है। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़ी कई समस्याओं में यह लाभकारी है।

आचार्या आनंदसाधिका ने कहा कि नियमित अभ्यास से मेरुदंड लचीला रहता है, मन में साहस और सकारात्मकता बढ़ती है तथा शरीर की कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। प्रशिक्षण शिविर में महिला स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और योग, साधना एवं नृत्य के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

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