जमशेदपुर। जिला समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) के बाहर फोटोकॉपी दुकान की आड़ में चल रहे कथित फर्जी दस्तावेज और एफिडेविट बनाने वाले रैकेट का शुक्रवार को स्थानीय अधिवक्ताओं ने पर्दाफाश किया। मामले में अजय, राजू और घाटशिला निवासी प्रहलाद अग्रवाल को पकड़कर अधिवक्ताओं ने नए बार परिसर में लाया, जहां उनसे पूछताछ की गई। बाद में पूरे मामले की सूचना सीतारामडेरा थाना पुलिस को दी गई।
जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता विनोद कुमार मिश्रा, अमित कुमार, अनंत गोप, परमजीत श्रीवास्तव, संजीव झा, जीतराम, नीरज सिंह और अक्षय झा समेत अन्य अधिवक्ताओं को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर संचालित एक दुकान की गतिविधियों पर संदेह हुआ। जांच के दौरान वहां से कई जाली मुहरें, तैयार फर्जी शपथ पत्र और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए। अधिवक्ताओं का आरोप है कि दुकान में बिना किसी अधिकृत सत्यापन के जाली हस्ताक्षर और मुहरों का इस्तेमाल कर एफिडेविट तैयार किए जा रहे थे।
बताया जा रहा है कि यह अवैध गतिविधि वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय और परिवहन विभाग की बाउंड्री के ठीक सामने लंबे समय से संचालित हो रही थी। अधिवक्ताओं ने कहा कि इस तरह की फर्जीवाड़े की घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं और अधिवक्ताओं की छवि भी खराब करती हैं।
घटना के बाद अधिवक्ताओं में आक्रोश है। अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही वरीय अधिकारियों से मिलकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और अन्य संदिग्ध केंद्रों पर छापेमारी की मांग करेगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कितने लोग शामिल हैं तथा अब तक कितने फर्जी दस्तावेज तैयार कर बाजार में खपाए जा चुके हैं।

