जमशेदपुर। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल में कार्यरत अस्थायी सफाई कर्मचारियों ने शुक्रवार को जोरदार प्रदर्शन किया। वर्षों से सेवा दे रहे इन कर्मियों ने स्थायीकरण की मांग को लेकर अस्पताल परिसर में एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।
प्रदर्शन का नेतृत्व एमजीएम अस्पताल अस्थायी सफाई कर्मचारी संघ के सचिव रवि नामता कर रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर अपनी मांगों को सामने रखते नजर आए। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 30 वर्षों से लगातार अस्पताल में सफाई कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी दर्जा नहीं दिया गया।
कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में भी उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों और अस्पताल की सेवा की। उस समय जब लोग घरों में सुरक्षित थे, तब ये सफाईकर्मी अस्पतालों में डटे रहे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो स्थायी किया गया और न ही किसी प्रकार की विशेष सुविधा या सम्मान मिला।
संघ के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि स्थायीकरण को लेकर वे कई बार राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे कर्मचारियों में गहरी निराशा और आक्रोश है।
प्रदर्शन में शामिल करीब 200 कर्मचारियों ने कहा कि वे वर्षों से कम वेतन और अस्थायी स्थिति में काम करने को मजबूर हैं। उन्हें न तो सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता है और न ही भविष्य को लेकर कोई स्थिरता है। ऐसे में अब वे अपनी मांगों को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं।
मजदूर दिवस के मौके पर किए गए इस प्रदर्शन के माध्यम से कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।

