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दलमा में सेंदरा पर्व रोकने के लिए पोटका से बहरागोड़ा तक वन विभाग का चलरहा सर्च ऑपरेशन

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम के दलमा पहाड़ी क्षेत्र में सेंदरा पर्व को लेकर इस बार प्रशासन और वन विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं। परंपरा के इस बड़े पर्व के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पोटका से लेकर बहरागोड़ा तक व्यापक स्तर पर सर्च अभियान चलाया जा रहा है और शिकार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई गई है।

पोटका क्षेत्र में सोमवार सुबह हाता स्थित वन विभाग कार्यालय के समीप विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान जमशेदपुर की ओर आने-जाने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली गई। खासकर उन लोगों पर नजर रखी गई, जिनके दलमा जंगल की ओर जाने की संभावना थी। संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर उन्हें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि सेंदरा पर्व के दौरान किसी भी प्रकार का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इस अभियान का नेतृत्व रेंज ऑफिसर शंकर भगत ने किया। उनके साथ हेड सब बीट ऑफिसर तन्मय चटर्जी, दशरथ सोरेन, किष्णु मुर्मू, हिमांशु कुमार और रुद्र नारायण दास सहित अन्य वनकर्मी मौजूद रहे। सब बीट ऑफिसर दुखुरम मुर्मू, अमल कुमार मुर्मू और सुजाता भी टीम में शामिल रहे। वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है और लोगों को जागरूक कर रही है कि वे परंपरा का पालन करते हुए वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाएं।

इधर बहरागोड़ा चेक नाका को सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनाते हुए कड़ी निगरानी रखी जा रही है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़े इस इलाके में 24 घंटे सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हर गुजरने वाले वाहन की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि तीर-धनुष, जाल या अन्य पारंपरिक हथियारों के जरिए शिकार की किसी भी कोशिश को रोका जा सके।

वन विभाग ने साफ कर दिया है कि सेंदरा पर्व की परंपरा का सम्मान किया जाएगा, लेकिन वन्यजीवों के शिकार को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अवैध शिकार में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए क्विक रिस्पांस टीम को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

इस बीच दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने सेंदरा पर्व को आदिवासी समाज की पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति श्रद्धा और सामुदायिक एकता का प्रतीक है, जिसे जिम्मेदारी के साथ निभाना जरूरी है।

वहीं वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी (डीएफओ) ने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की रक्षा करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सेंदरा पर्व को प्रतीकात्मक रूप में मनाएं और जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

परंपरा और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की इस पहल के तहत इस बार दलमा क्षेत्र में सेंदरा पर्व कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हो रहा है।

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