कोडरमा ।।श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया में समाधिस्थ परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराजके आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री 108 धर्म
सागर जी महाराज एवं मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में धर्म सभा का आयोजन किया गया ।जिसके अंतर्गत मांगलिक क्रियाएं संपन्न की गई । इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 भावसागर जी महाराज ने कहा कि गौ ही देश का परम मंगलायन है । गौधन ही भारत का जीवन है। जगत में गौ गौरव के साथ जीती रहे। गौ सेवा राष्ट्रीय धर्म है। गौ सेवा मुख्य कर्तव्य है ।गौ रक्षा अपना जीवन है। ।भारत का गोधन एक महान राष्ट्रीयनिधि है। गौ से प्रेय और श्रेय की प्राप्ति होती है।गौ धन भारतीय जीवन का मूलाधार है। परम अध्यात्म की प्रतीक गाय है।
गाय भारत की आत्मा है ।गाय धरती के लिए वरदान है। गौ भारतीय संस्कृति का मेरुदंड है। संसार की श्रेष्ठतम पवित्र वस्तु गाय है। भक्ति, मुक्ति और शक्ति का स्रोत गौ सेवा है। सच्ची सुख शांति का मूल उपाय -गौ सेवा है।
जो गौ सेवा नहीं करता वह श्री विहीन ( धन रहित ) हो जाता है। आर्थिक समृद्धि का प्राण है गोधन राष्ट्र विकास में गौवंश महत्वपूर्ण योगदान है । आयुर्वेद, धार्मिक, वैज्ञानिक, आर्थिक लाभ होते है गाय के पालन से। भारत का राष्ट्रीय पेय है दूध गौ के बिना घर शून्य है।मानव उन्नति गौ रक्षा पर ही निर्भर है । गाय सुख समृद्धि की जननी है। प्राचीन काल में जिसके पास ज्यादा गायें होती थी वही सम्पत्तिशाली माना जाता था । धार्मिक एवं पारमार्थिक दृष्टि से भी प्रति घर में गाय अवश्य रखनी चाहिए। कोढ आदि महारोगों के लिए गाय का दूध एक मात्र अनुभवसिद्ध औषध है । हृदय रोग और पाण्डुरोग लाल रंग की गाय के दूध से दूर होता है ।
हिंदुस्तान के सब डॉक्टर, वकील, ग्रंथकार, पत्रकार और सामाजिक नेता, सर्विस मेन,विजनिस मेन, धार्मिकं तथा अन्य कार्यकर्ता गाय के पालन में लग जायें तो बहुत बड़ी क्रांति आ सकती है।आजकल गृहस्थों ने गाय रखना बंद कर दिया है।कार, मकान, दुकान, कपड़े, सप्त व्यसन, जुआ शराब आदि में पैसा तो बर्बाद कर रहे हैं।गाय एक भी नहीं रखते हैं । प्रत्येक परिवार एक एक गाय रख लें तो करोड़ों गायों का पालन हो सकता है। गौ के दूध, दही और घी आदि में सब विटामिन आदि मौजूद हैं, जो अन्य किसी पदार्थ आदि में नहीं पाये जाते । और मनुष्य के लिए आवयश्क है गौ का दूध जन्मे हुए बच्चे से लेकर मरण पर्यन्त उपयोगी है ।और रोग अवस्था में भी परमोपयोगी है। हिंदुस्तान किसानों का मुल्क है। हिन्दुस्तानी सभ्यता का नाम ही गौ सेवा है। गाय के दूध के बराबर बलशाली और हितकारी कोई अन्य खाद्य पदार्थ संसार में नहीं गाय नित्य सुरभि है ।गाय का दूध पीने से अस्तिक्षय एवं कई प्रकार के रोग दूर किये जाते है ।गाय के घी से गठिया कुष्ठरोग नेत्ररोग ठीक हो जाता है । कैंसर रोग में गाय का दूध फायदे मन्द है । जहाँ गाय होती है वहा की हवा कीटाणु रहित होती है। गाय से
गौ पर्यावरण सुरक्षा, जल रक्षा, जंगल रक्षा, भूमि रक्षा, धर्म रक्षा, राष्ट्र रक्षा, शाकाहारको प्रचार प्रसार करना उद्देश्य रहे हमारा । गौमाता, गौदान, गोकुल, जीवदया, गौ सेवा, गौ ग्रास श्वेत क्रांति ला सकते हैं। गाय से विश्व उष्ण तापमान नियंत्रण, विश्व कल्याणकारी, विश्व मंगलकारी, विश्व बंधुत्व कारी, विश्व जीव रक्षा, विश्व ओजोन वायु पटल छिद्र निर्मूलन, विश्व करुणाकारी, विश्व मैत्रीकारी, विश्व आरोग्यकारी, विश्व जल, वायु रक्षा, विश्व वन रक्षा, हो सकती है
गाय करोड़ो लोगों की माता है।
गाय का दूध बुढ़ापे के सब रोगों को नाश करने वाला बताया है।
गाय का दूध सर्वश्रेष्ठ रक्षात्मक भोजन माना गया है।
गाय आरोग्य, संतति, शांति देती है।
गाय मनुष्य के लिए अमूल्य रत्न है।
गाय दुनिया की सर्वश्रेष्ठ अर्थ प्रदाता है, अनावृष्टि से बचाती है।
कैंसर में काली गाय का दूध फायदेमंद होता है।कई संक्रमण रोग गाय की स्पर्श वायु से ठीक हो जाते हैं ।
गोबर में जहर खींचने की शक्ति होती है जहाँ गौशाला होती है वहाँ की हवा कीटाणु रहित शुद्ध होती है।
गाय विटामिनों का कारखाना
कोढ आदि रोगों के लिए गाय का दूध एक मात्र औषध है।
जो लोग गाय का दान करते हैं समस्त संकटों ओर पापों से पार हो जाते हैं। अकाल मृत्यु से बच जाते हैं। जो गायों की सेवा करते हैं।
जहाँ गाय रहती है वहाँ का वातावरण कीटाणु रहित हो जाता है।
गाय का घी आँखों के लिए लाभ दायक है,
गायों का समूह जहाँ बैठकर सांस लेता है वह स्थान चमक उठता है और वास्तु दोष दूर हो
जाता है।
गाय के सींग से विशेष ऊर्जा मिलती हैं,
पहले जिस घर में गाय नहीं होती थी श्मसान के समान समझा जाता था।
गाय के दूध में स्वर्ण होता है।
जैन संत मुनि श्री 108 भाव सागर जी मुनीराज द्वारा इस कथन के माध्यम से लोगों को अवगत कराया गया ।।

