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सारंडा में सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी का दौरा, नक्सलियों को एक माह का अल्टीमेटम

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से शनिवार को सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी दीपक कुमार बालिबा गांव स्थित 193 बटालियन कैंप पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कैंप में तैनात जवानों से मुलाकात की, उनका मनोबल बढ़ाया और जमीनी स्तर पर चल रहे ऑपरेशन की विस्तृत समीक्षा की। करीब दो घंटे तक कैंप में रुककर उन्होंने सुरक्षा रणनीति, ऑपरेशनल चुनौतियों और जवानों की जरूरतों पर अधिकारियों के साथ चर्चा की।

निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में स्पेशल डीजी ने नक्सलियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सारंडा और आसपास के इलाकों में सक्रिय नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए एक महीने का अंतिम अवसर दिया गया है। यदि इस अवधि में वे सरेंडर नहीं करते हैं, तो सुरक्षा बल उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अभियान तेज कर दिया गया है और आने वाले समय में क्षेत्र को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आएंगे। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल इस इलाके में करीब 45 से 50 नक्सली सक्रिय हैं, लेकिन अब तक किसी भी संगठन की ओर से आत्मसमर्पण की कोई पहल नहीं हुई है।

दौरे के दौरान आईजी साकेत कुमार, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे, रांची डीआईजी सतीश लिंडा, सीआरपीएफ डीआईजी विनोद कार्तिक, कमांडेंट ओम जी शुक्ला और पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनू समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से क्षेत्र में चल रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन की समीक्षा की और आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया।

इसी बीच हेलीपैड पर एक अप्रत्याशित घटना ने कुछ देर के लिए अफरातफरी की स्थिति पैदा कर दी। कोबरा 205 बटालियन के जवान अनिल बिस्वाल, जो पहले से मलेरिया से पीड़ित थे, अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद साथियों और मेडिकल टीम ने तुरंत प्राथमिक उपचार देते हुए उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए बेहतर इलाज के लिए रवाना किया। जानकारी के अनुसार, कुल सात बीमार जवानों को एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए भेजा गया है। सभी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां सुरक्षा बलों के लिए ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि हाल के वर्षों में लगातार चल रहे अभियानों के चलते नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि इसी तरह अभियान तेज रहा, तो जल्द ही इस इलाके को पूरी तरह नक्सलमुक्त किया जा सकता है।

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