जमशेदपुर। गुरुवार को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन ने सबल–ज्ञानोदय केंद्र में एक संवेदनशील और समावेशी पहल “डे विदआउट डिमांड्स” का आयोजन किया। इस पहल के माध्यम से संस्था ने न्यूरोडाइवर्सिटी को सम्मान देने और बच्चों की जरूरतों के अनुसार सीखने का वातावरण तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
परंपरागत आयोजनों से अलग इस पहल में बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव, निर्देश या प्रदर्शन की अपेक्षा नहीं रखी गई। इसके बजाय पूरे वातावरण को इस तरह ढाला गया कि वह बच्चों की संवेदनात्मक, भावनात्मक और संवाद संबंधी जरूरतों के अनुरूप हो। सबल–ज्ञानोदय में चर्चा कक्ष को एक लचीले और सहज स्थान में बदल दिया गया, जहां फर्श पर मैट, सॉफ्ट प्ले सामग्री और खुली जगह उपलब्ध कराई गई, ताकि बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार बैठ सकें, लेट सकें, घूम सकें या केवल आसपास के माहौल को महसूस कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान धीमी वाद्य संगीत की निरंतर धुन ने शांत और संतुलित माहौल बनाने में मदद की, जिससे बच्चों को स्वयं को नियंत्रित करने और सहज महसूस करने में सहयोग मिला। बच्चों को कागज, रंग और मिट्टी जैसे खुले रचनात्मक साधन दिए गए, जिनमें किसी प्रकार का विषय या निर्देश नहीं था। बच्चों की अभिव्यक्ति को हर रूप में स्वीकार किया गया, चाहे वह मौन हो, संवेदनात्मक अनुभव हो या स्वतंत्र रूप से गतिविधियों में भागीदारी।
इस दौरान “बडी टाइम” जैसी वैकल्पिक गतिविधियों के जरिए बच्चों को बिना किसी दबाव के साथ समय बिताने का अवसर मिला। इसमें बच्चों को आपस में जुड़ने या केवल एक-दूसरे के साथ मौजूद रहने की स्वतंत्रता दी गई, जिसे भी समान रूप से महत्वपूर्ण माना गया। पूरे दिन का कार्यक्रम पूरी तरह लचीला और बच्चों की गति के अनुरूप रखा गया, जिससे वे अपनी सुविधा से गतिविधियों के बीच आ-जा सकें।
शिक्षकों ने भी अपनी भूमिका में बदलाव करते हुए निर्देश देने के बजाय बच्चों के साथ बैठकर उन्हें समझने और सहयोग करने पर ध्यान दिया। उन्होंने कम संवाद, अधिक अवलोकन और सह-नियमन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि हर बच्चे की पसंद और गति का सम्मान हो। बच्चों के व्यवहार, जैसे बेचैनी या अलग-थलग रहना, को भी संचार का एक रूप मानते हुए संवेदनशीलता और सुरक्षा के साथ प्रतिक्रिया दी गई।
इस पहल में अभिभावकों को भी आमंत्रित किया गया, ताकि वे अपने बच्चों के व्यवहार और उनकी सहजता को बेहतर तरीके से समझ सकें और घर तथा स्कूल के वातावरण में समन्वय स्थापित कर सकें।
इस अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन के स्किल डेवलपमेंट, डिसएबिलिटी एवं स्पोर्ट्स विभाग के प्रमुख कैप्टन अमिताभ ने कहा कि समावेशन का अर्थ बच्चों को हमारे सिस्टम में ढालना नहीं, बल्कि सिस्टम को बच्चों के अनुरूप बनाना है। उन्होंने बताया कि “डे विदआउट डिमांड्स” इसी सोच से प्रेरित पहल है, जिसमें अपेक्षाओं को कम कर बच्चों को अपनी शर्तों पर जुड़ने का अवसर दिया गया। इससे बच्चों में शांति, आत्म-नियंत्रण और स्वाभाविक सहभागिता देखने को मिली।
टाटा स्टील फाउंडेशन अपने सबल कार्यक्रम के माध्यम से लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जो न्यूरोडाइवर्सिटी का सम्मान करते हुए बच्चों को उनकी प्राकृतिक शैली में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करें।

