जमशेदपुर। टेल्को स्थित लक्ष्मीनगर हनुमान मंदिर प्रांगण में युवक संघ दुर्गा पूजा समिति द्वारा आयोजित पार्थिव पूजन सह शिव कथा यज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में जुटी, जहां विधि-विधान से पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण और पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से लगभग एक लाख पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।
पूजन कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। प्रयागराज से पधारे आचार्य श्री राजकुमार मिश्रा जी के निर्देशन में पार्थिव पूजन संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया और भगवान शिव से सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं कल्याण की कामना की। पूजन के पश्चात रुद्राभिषेक एवं भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
पूजन के बाद सभी पार्थिव शिवलिंगों का अस्थायी विसर्जन पास के साइंटिफिक उद्यान में बनाए गए कृत्रिम तालाब में किया गया। समिति के सदस्यों ने बताया कि यज्ञ की पूर्णाहुति के उपरांत इन शिवलिंगों का विधिवत विसर्जन नदी में किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन करना है।
युवक संघ दुर्गा पूजा समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे मिट्टी, फूल, बेलपत्र, दूध आदि की निःशुल्क व्यवस्था की गई थी, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पुण्य कार्य में भाग ले सकें। समिति के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह, महासचिव संजय कुमार (लाल), कोषाध्यक्ष संजय कुमार कुशवाहा, उपाध्यक्ष सतीश कुमार, विजय कुमार, बुलबुल जी, जय चौधरी और अमन सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
पार्थिव शिव पूजन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार मिट्टी से बने शिवलिंग का पूजन करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह पूजा विशेष रूप से कष्टों के निवारण, पापों के क्षय और जीवन में शांति एवं समृद्धि के लिए की जाती है। शिव महिमा का वर्णन करते हुए आचार्य राजकुमार मिश्रा जी ने बताया कि भगवान शिव सरल और भोले स्वभाव के देव हैं, जो सच्ची भक्ति से ही प्रसन्न हो जाते हैं। पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और पूजन मनुष्य को प्रकृति से जोड़ता है और विनम्रता तथा समर्पण का संदेश देता है।
कार्यक्रम के दौरान शिव कथा का भी आयोजन किया गया, जिसमें भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, उनकी महिमा और भक्तों पर उनकी कृपा के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन रहा है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी सशक्त कर रहा है।

