Breaking
Wed. Feb 11th, 2026

टाटा लीज नवीनीकरण पर मूलवासी अधिकार मंच ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, रैयतों और विस्थापितों के अधिकारों की उठाई मांग

जमशेदपुर। झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण से जुड़े मामलों को लेकर पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में रैयतों, मूल निवासियों और विस्थापितों के संवैधानिक व वैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है। मंच ने आरोप लगाया कि वर्ष 2005 में हुए लीज नवीनीकरण के दौरान रैयतों और विस्थापितों को न्याय नहीं मिला, इसलिए इस प्रक्रिया की जिला स्तर पर पुनः समीक्षा और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया है कि लीज नवीनीकरण के समय कई रैयतों की जमीन या तो प्रक्रिया से छूट गई या जानबूझकर शामिल नहीं की गई। ऐसी सभी जमीनों को चिन्हित कर मूल रैयतों को वापस किया जाए। मंच का आरोप है कि बिना विधिवत लीज या अधिग्रहण के कई भूमि पर कब्जा किया गया है, जिसकी पहचान कर CNT/SPT अधिनियम और भूमि सुधार कानून के तहत अवैध कब्जों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

मंच ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने तालाबों, जलस्रोतों और गैर-मजरूआ जमीन को ग्रामसभा के हवाले करने तथा निजी और कॉरपोरेट कब्जा समाप्त करने की मांग की है। साथ ही पेसा कानून का हवाला देते हुए कहा गया है कि ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना किसी भी भूमि संबंधी निर्णय पर रोक लगाई जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि लीज नवीनीकरण प्रक्रिया में विस्थापितों और रैयत प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, भूमि उपयोग और लीज से संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं तथा टाटा कंपनी के पास उपलब्ध कुल लीज भूमि, उपयोग की गई भूमि और कथित अवैध कब्जे की सूची सार्वजनिक की जाए। इसके अलावा प्रभावित रैयतों और विस्थापितों के पुनर्वास, रोजगार और आजीविका सुनिश्चित करने, जिला स्तरीय निगरानी समिति के गठन, विस्थापित प्रमाण पत्र जारी करने और टाटा स्टील की बहाली प्रक्रिया में स्थानीय रैयतों व टाटा विस्थापितों को प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई है।

मंच ने मूल रैयत खतियानधारियों की जांच के लिए समिति गठित करने की भी मांग की है। ज्ञापन के साथ रैयतों की एक अतिरिक्त सूची संलग्न की गई है। झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने उपायुक्त से सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है, ताकि रैयतों, मूल निवासियों और विस्थापितों को उनका हक और न्याय मिल सके।

Related Post