जमशेदपुर: शहीदी पखवाड़े के अवसर पर मानगो गुरुद्वारा साहिब में आयोजित ‘सफ़र-ए-शहादत सप्ताह’ का समापन अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और गुरमत मर्यादा के अनुरूप भव्य रूप से किया गया। सप्ताह भर चले इन धार्मिक समागमों में संगत ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और गुरु इतिहास व शहादतों को स्मरण करते हुए सेवा भाव का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के पहले दिन दो महीनों से चल रहे पावन सहज पाठों की समापनता की गई। इसके उपरांत बच्ची प्रभजोत कौर ने दो दिनों तक गुरमत विचारों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर संगत को गुरु चरणों से जोड़ा। वहीं बहन मनप्रीत कौर द्वारा भी एक दिन विशेष कथा विचार प्रस्तुत की गई।
समागम के दौरान छोटे-छोटे बच्चों ने प्रतिदिन श्रद्धा भाव से कविताओं का पाठ और कीर्तन सोहिला का उच्चारण किया, जिससे पूरे गुरुद्वारा परिसर का वातावरण अत्यंत पावन और भाव-विभोर हो गया।
25 दिसंबर से भाई अमरीक सिंह जी (चंडीगढ़ वाले) ने गुरु इतिहास की गहन कथा के माध्यम से साहिबजादों एवं गुरु घर की अतुलनीय शहादतों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
प्रतिदिन सायंकाल रहिरास साहिब का पाठ, सुखासन और अरदास की सेवा कभी बच्चों, कभी स्त्री सत्संग सभा, कभी नौजवानों तथा कभी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एवं सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुई, जो संगत में एकता और साझा सेवा का सुंदर प्रतीक बनी।
27 दिसंबर को श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में विशेष गुरमत समागम आयोजित किए गए। वहीं 28 दिसंबर को रक्तदान शिविर, नेत्र जांच शिविर और हेल्थ चेकअप कैंप लगाकर गुरबाणी के संदेश “सरबत का भला” को व्यवहारिक रूप दिया गया।
समागम के दौरान प्रतिदिन लंगर सेवा नौजवान वीरों एवं स्त्री सत्संग सभा की बहनों द्वारा स्वयं तैयार कर प्रेम, सेवा और नम्रता के साथ निभाई गई। साथ ही प्रतिदिन दूध का लंगर भी संगत के लिए लगाया गया।
इस अवसर पर सीजीपीसी प्रधान भगवान सिंह, गुरुचरण सिंह बिल्ला, सुखविंदर सिंह राजू, सरबजीत सिंह ग्रेवाल, सुखदेव सिंह बिट्टू, जुझार सिंह, नवनीत सिंह, जगराज सिंह, सपिंदर सिंह, हाशमीत सिंह, जगजीत सिंह, जसकीरत सिंह, जसकरण सिंह, गुरमनप्रीत सिंह, लवप्रीत सिंह, राजू पांडेय और अर्श सिंह सहित कई गणमान्य लोगों की विशेष मौजूदगी रही।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सहयोग करने वाले सभी भाई-बहन, सेवादार, प्रचारक, डॉक्टर साहिबान और प्रबंधक कमेटी के सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया। अंत में वाहेगुरु से सभी पर अपार कृपा बनाए रखने की अरदास की गई।

