जमशेदपुर।झारखंड में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने और निवेश व रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में झारखंड इंडस्ट्रियल पॉलिसी लैब का गठन किया गया है, जो झारखंड इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जिडको) और झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) की संयुक्त पहल है। इस नीति लैब के माध्यम से राज्य में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने को लेकर गहन शोध और व्यावहारिक रणनीतियां विकसित की जा रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया में एक्सएलआरआइ जमशेदपुर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनकर उभरी है।
शनिवार को एक्सएलआरआइ जमशेदपुर परिसर में झारखंड इंडस्ट्रियल पॉलिसी लैब 2025-26 के तहत फाइनल प्रेजेंटेशन का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के आधार पर छह टीमों का चयन अगले चरण के लिए किया गया। चयनित टीमें फरवरी माह में रांची में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राज्य के औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपना विस्तृत प्रेजेंटेशन देंगी। इस दौरान एक्सएलआरआइ के छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अलग-अलग सेक्टर में राज्य के विकास का संपूर्ण रोडमैप प्रस्तुत करेंगे।
इस नीति लैब कार्यक्रम में कुल 28 छात्र टीमों ने हिस्सा लिया। इनमें पब्लिक पॉलिसी एंड बिजनेस स्ट्रैटेजी (पीपीबीएस) कोर्स की 16 टीमें और कमेटी फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च (सीपीपीआर) की 12 टीमें शामिल थीं। प्रारंभिक समीक्षा के बाद 20 टीमों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया। शनिवार को आयोजित अंतिम प्रेजेंटेशन के दौरान जिडको और जियाडा के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन, पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, इन्वेस्ट इंडिया तथा उद्योग जगत से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सभी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। इसके बाद कुल छह टीमों को अगले चरण के लिए अंतिम रूप से चयनित किया गया।
वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों की उपस्थिति ने छात्रों को नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों को समझने का व्यावहारिक अवसर प्रदान किया। इस मौके पर एक्सएलआरआइ के एसोसिएट प्रोफेसर (स्ट्रेटेजी एरिया) एवं कोर्स इंस्ट्रक्टर डॉ. कल्याण भास्कर ने कहा कि यह नीति लैब इस बात का उदाहरण है कि कैसे सशक्त शैक्षणिक ढांचे को व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले नीति एवं व्यावसायिक रणनीति समाधानों में बदला जा सकता है। उन्होंने इसे छात्रों के लिए एक अनूठा अनुभवात्मक शिक्षण अवसर बताया।
वहीं जिडको के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने छात्र प्रस्तुतियों की गहराई और मौलिकता की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहलें साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूती प्रदान करती हैं और भविष्य के नेतृत्वकर्ता तथा सरकारी संस्थानों के बीच शुरुआती स्तर पर प्रभावी संवाद और जुड़ाव को बढ़ावा देती हैं।
फाइनल रूप से चयनित टीमों में पब्लिक पॉलिसी एंड बिजनेस स्ट्रैटेजी समूह की पांच टीमें और कमेटी फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च की एक टीम शामिल है। ये टीमें झारखंड को वर्ष 2035 तक भारत का औद्योगिक हब बनाने की दृष्टि, जियाडा की निष्क्रिय भूमि संपत्तियों का बेहतर उपयोग, देश का पहला नेट-जीरो इंडस्ट्रियल एस्टेट, खनिज-आधारित उद्योगों के लिए अगली पीढ़ी का विशेष आर्थिक क्षेत्र मॉडल और निवेश सुविधा के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के नए स्वरूप जैसे विषयों पर अपने-अपने समाधान प्रस्तुत कर रही हैं। इन प्रयासों से झारखंड की औद्योगिक नीति को नई सोच और ठोस दिशा मिलने की उम्मीद है।

