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झारखंड में परीक्षा शुल्क वृद्धि पर एनसीपी नेता पवन पांडेय की चिंता — मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

जमशेदपुर। झारखंड में अचानक बढ़े परीक्षा शुल्क और छात्रवृत्ति से जुड़ी जटिलताओं के कारण छात्रों में बढ़ते असंतोष पर एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव (नगर निकाय) एवं झारखंड–ओडिशा–बिहार प्रभारी डॉ. पवन पांडेय ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पत्र लिखकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्चों को स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, वे आज सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति दर्शाता है।

शुक्रवार को डॉ. पांडेय ने पत्र में उल्लेख किया कि कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा शुल्क में की गई अचानक भारी वृद्धि ने सामान्य वर्ग के छात्रों के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। जहां पहले यह शुल्क 500 से 600 रुपये के बीच था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है। आरक्षित वर्ग के छात्रों के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।

उन्होंने बताया कि फीस बढ़ने के साथ-साथ छात्रवृत्ति वितरण में भी सरकार की उदासीनता छात्रों को और परेशान कर रही है। छात्रवृत्ति के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य कर देना ऐसे विद्यार्थियों के लिए मुश्किल बढ़ा रहा है जो छोटे शहरों और गांवों से आते हैं तथा अपनी पढ़ाई का खर्च छात्रवृत्ति के सहारे पूरा करते हैं। डॉ. पांडेय के अनुसार, अधिकांश स्कूली छात्र पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया से गुजरने में सक्षम नहीं हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो हजारों छात्र आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं, जो राज्य और देश दोनों के भविष्य के लिए गंभीर संकेत हैं। डॉ. पांडेय ने मुख्यमंत्री से अपील की कि सरकार छात्रों के हितों की अनदेखी न करे और तुरंत प्रभाव से परीक्षा शुल्क में कटौती करते हुए लंबित छात्रवृत्ति अविलंब जारी करे, ताकि युवा अपनी शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रख सकें।

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