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Wed. Mar 4th, 2026

चतुर्थ बाल मेला में बच्चों की प्रतिभा ने मोहा मन, नवाचारों से सजा विज्ञान प्रदर्शनी का मंच

जमशेदपुर। गुरुवार को चतुर्थ बाल मेला में इस बार बच्चों की रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने आगंतुकों को आश्चर्यचकित कर दिया। मेले में जहां खेल, भाषण और निबंध प्रतियोगिताओं ने बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया, वहीं विज्ञान प्रदर्शनी में उभरते वैज्ञानिकों के मॉडल्स ने मेले की शोभा बढ़ा दी। विभिन्न स्कूलों के छात्र–छात्राओं ने ऐसी तकनीकी अवधारणाएं प्रस्तुत कीं, जो भविष्य की चुनौतियों का समाधान बन सकती हैं।

मेला परिसर में तीन ऐसे मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र बने, जिनके सामने लोग रुककर बच्चों की कल्पनाशीलता और मेहनत की सराहना किए बिना नहीं रह सके।

सस्ते और घरेलू उपयोग का बैटरी चार्जर — अंश कुमार सिन्हा, विवेक विद्यालय

विवेक विद्यालय के विद्यार्थी अंश कुमार सिन्हा ने ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो बिना महंगे उपकरणों के बैटरी चार्ज कर सकता है। इस मॉडल में सिर्फ तार, गत्ता और साधारण सर्किट का इस्तेमाल किया गया है। अंश ने बताया कि यह चार्जर बिना किसी विशेष तकनीकी ज्ञान के घर में भी बनाया जा सकता है। जहां बाजार में बैटरी चार्जर 1000–2000 रुपये तक मिलते हैं, वहीं यह मॉडल बेहद कम लागत में तैयार हो सकता है। उनका उद्देश्य आम लोगों तक किफायती तकनीक पहुंचाना है।

कार्मल जूनियर कॉलेज के छात्र किसलय पॉल ने बढ़ते प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए एक उन्नत एयर प्यूरीफायर बनाया है। किसलय के मॉडल में एक विशेष इन्सीनेटर दिया गया है, जिसमें कचरा जलाने से निकलने वाली प्रदूषित हवा को पाइप की मदद से फिल्टर कर शुद्ध किया जाता है। शुद्ध हुई हवा को अलग स्टोर सेंटर में जमा किया जा सकता है। किसलय के अनुसार, बढ़ते प्रदूषण के दौर में यह तकनीक शहरों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, खासकर तब जब खुले में कचरा जलाने की समस्या बढ़ती जा रही है।

सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, बर्मामाइंस के छात्र अयंक राज ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक अत्याधुनिक एनर्जी सेवर सिस्टम विकसित किया है। इस मॉडल के अनुसार, सेटेलाइट सूर्य से आने वाली उन ऊर्जा किरणों—जैसे इंफ्रारेड, एक्स-रे, गामा रे—को कैप्चर करेगा, जिनका सामान्यतः पृथ्वी पर उपयोग नहीं हो पाता। सेटेलाइट इन ऊर्जा किरणों को वायरलेस तरीके से पृथ्वी तक ट्रांसफर करेगा, जहां उनका प्यूरीफिकेशन कर उन्हें उपयोगी ऊर्जा में बदला जाएगा। अयंक का दावा है कि यह प्रणाली भविष्य में ऊर्जा संकट के समाधान में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

बच्चों द्वारा प्रस्तुत ये मॉडल न सिर्फ वैज्ञानिक समझ को दर्शाते हैं, बल्कि भविष्य की तकनीक की एक झलक भी प्रस्तुत करते हैं। मेले में आए अभिभावक और आगंतुक इन नवाचारों को देखकर गद्गद हो उठे। आयोजकों का कहना है कि ऐसे मेले बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की दिशा में प्रेरित करते हैं।

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