जमशेदपुर। धनतेरस के अवसर पर इस वर्ष जमशेदपुर के बाजारों में खरीदारी का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, शहर और आसपास के प्रमुख बाजारों में कुल कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। बिष्टुपुर, साकची, जुगसलाई, कदमा, सोनारी, आदित्यपुर-गम्हरिया, बारीडीह, सिदगोड़ा, एग्रिको और टेल्को समेत विभिन्न बाजारों में सुबह से ही ग्राहकों की भारी भीड़ रही।
कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया ने कहा कि धनतेरस पर जमशेदपुर के पारंपरिक बाजारों में दिखा उत्साह उपभोक्ताओं के मजबूत विश्वास और घरेलू खुदरा कारोबार में आई तेजी को दर्शाता है। सोने-चांदी के आभूषणों, सिक्कों, बर्तनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरणों, ऑटोमोबाइल और पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी हुई।
सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने के बावजूद खरीदारी में उत्साह
सोंथालिया ने बताया कि सोने और चांदी की ऊंची कीमतों के बावजूद ग्राहकों ने खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई। हल्के वजन के आभूषणों, पारंपरिक गहनों और चांदी के सिक्कों की मांग रही। उनके अनुसार, धनतेरस के दिन सोने का भाव लगभग 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव करीब 1.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रहा। धनतेरस से पहले सोना लगभग 1.32 लाख रुपये और चांदी करीब 1.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी।
उन्होंने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद शुभ अवसर पर सोने-चांदी की खरीदारी को लेकर लोगों का उत्साह बना रहा। अंतिम कारोबार का आंकड़ा खरीदारी की गति और बाजार की स्थिति के आधार पर स्पष्ट होगा।
बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल बाजार में भी रौनक
धनतेरस पर खरीदारी का उत्साह केवल आभूषण बाजार तक सीमित नहीं रहा। बर्तन, रसोई के सामान, मोबाइल फोन, लैपटॉप, टेलीविजन, घरेलू उपकरण, बिजली के सामान और ऑटोमोबाइल शोरूम में भी ग्राहकों की अच्छी भीड़ देखने को मिली। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लोगों ने तांबे, चांदी और स्टील के बर्तनों के साथ झाड़ू तथा मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों की भी खरीदारी की।
स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय कारोबार को लाभ
कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री ने त्योहारी कारोबार में तेजी के पीछे जीएसटी दरों में कटौती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी अपनाने के आह्वान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों, घरेलू निर्माताओं, कारीगरों और एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बार खरीदारी का उत्साह बड़े शॉपिंग मॉल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पारंपरिक बाजारों और स्थानीय दुकानों में भी अच्छी रौनक देखने को मिली। धनतेरस और दीपावली जैसे पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी गति देते हैं।
सोंथालिया ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी से स्थानीय कारोबार मजबूत होता है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बढ़ावा मिलता है।

