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*जनजातीय गौरव पखवाड़ा पर केंद्रीय विद्यालय में प्रेरणादायक सत्र, आदिवासी वीरों के संघर्ष से रूबरू हुए विद्यार्थी*

चाईबासा: राष्ट्रव्यापी जनजातीय गौरव पखवाड़ा के तहत पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, चक्रधरपुर में शुक्रवार को विशेष प्रेरणादायक सत्र का आयोजन किया गया। 1 से 15 नवंबर तक चल रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, संघर्ष और जनजातीय इतिहास से परिचित कराना था।

कार्यक्रम में आदिवासी युवा समाजसेवी एवं शोधकर्ता पंकज बांकीरा और रबिन्द्र गिलुवा ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। पंकज बांकीरा ने पोटो हो, रानी गाइदिन्ल्यू, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या भील, भीमा नायक, अल्लूरी सीताराम राजू, कोमाराम भीम, यू तिरोत सिंह, वीर नारायण सिंह और लक्ष्मण नायक के संघर्षों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन वीरों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष कर देश की आजादी और आदिवासी अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।

रानी गाइदिन्ल्यू के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया था। इस प्रसंग से विद्यार्थियों को काफी प्रेरणा मिली।

दूसरे सत्र में सामाजिक कार्यकर्ता, शोधकर्ता और डिजिटल क्रिएटर रबिन्द्र गिलुवा ने अपने जीवन संघर्ष और सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्काउट्स एवं गाइड्स से जुड़कर वर्ष 2014 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त किया। वर्ष 2017 से वे आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं।

वे आदिवासी युवा मित्र मंडल के सचिव तथा कोल्हान नीतिर तुरतुंग और कोल्हान सेमिनार के संस्थापक सदस्य हैं। उन्होंने ‘डोनेट ब्लड : बी ए हीरो’ ऐप के माध्यम से रक्तदान और जरूरतमंदों की सहायता की जानकारी दी। आदिवासी इनसाइट्स और झारखंड्स लाइफ के जरिए भी वे जागरूकता फैलाते हैं। वर्तमान में संवाद फेलोशिप के तहत हो समाज के पारंपरिक गोत्र पर शोध कर रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को ‘Adivasi Lives Matter’, ‘Adivasi Insights’ और ‘Jharkhand’s Life’ से जुड़ने की सलाह दी गई। आगामी शनिवार को पोटका केंद्रीय विद्यालय में भी संवाद सत्र आयोजित करने की योजना बनाई गई।

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