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सीएसआईआर-एनएमएल में सीआईपीईटी अधिकारियों का पांच दिवसीय धातु पाइप प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

जमशेदपुर। सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) के अधिकारियों के लिए आयोजित पांच दिवसीय एक्सपोजर प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑन मेटैलिक पाइप्स (ETMP’26) का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य धातु पाइपों की सामग्री, निर्माण तकनीक, गुणवत्ता मानक, परीक्षण, निरीक्षण और मूल्यांकन से संबंधित प्रतिभागियों की तकनीकी दक्षता को बढ़ाना था।

प्रशिक्षण के दौरान सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने धातु पाइपों के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर व्याख्यान और व्यावहारिक सत्र आयोजित किए। प्रतिभागियों को पाइप निर्माण में प्रयुक्त धातुओं की विशेषताओं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों, परीक्षण प्रक्रियाओं, गैर-विनाशकारी परीक्षण (एनडीटी), संक्षारण नियंत्रण, सुरक्षात्मक कोटिंग और गुणवत्ता निरीक्षण की जानकारी दी गई। व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को इन प्रक्रियाओं की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर भी मिला।

समापन समारोह का संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पी. मुंडा ने किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारी और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रशिक्षण की विषयवस्तु, व्यावहारिक सत्रों और विशेषज्ञों के साथ संवाद को उपयोगी बताते हुए कार्यक्रम की सराहना की। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. बिराज कुमार साहू और डॉ. पी. मुंडा के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

सीएसआईआर-एनएमएल के मैटेरियल्स इंजीनियरिंग डिवीजन (एमटीई) के प्रमुख डॉ. एस. शिवप्रसाद ने समापन संबोधन में सीआईपीईटी अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तकनीकी प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान गुणवत्ता आश्वासन तथा व्यावसायिक दक्षता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित प्रमाणपत्र वितरण समारोह में डॉ. एस. शिवप्रसाद, डॉ. वी.सी. श्रीवास्तव, डॉ. मैनक घोष और डॉ. जे.के. साहू ने सीआईपीईटी के प्रतिभागी अधिकारियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय डॉ. बिराज कुमार साहू और डॉ. पी. मुंडा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों और आयोजन समिति के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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