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*32 वर्षों की गौरवपूर्ण सेवा : पूर्व वायुसेना जूनियर वारंट ऑफिसर नवल किशोर पाठक* *कारगिल युद्ध से ऑपरेशन पराक्रम और बालाकोट तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, सेवा के दौरान मिले कई सम्मान*

जमशेदपुर।भारतीय वायुसेना में 32 वर्षों तक अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के साथ सेवा देने वाले पूर्व जूनियर वारंट ऑफिसर नवल किशोर पाठक की सैन्य यात्रा जिम्मेदारी और सेवा भावना की मिसाल रही है। उन्होंने 6 अक्टूबर 1987 को भारतीय वायुसेना में अपना सेवा जीवन प्रारंभ किया और 31 अक्टूबर 2019 को सेवानिवृत्त हुए। तीन दशक से अधिक लंबे कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण परिस्थितियों में अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
नवल किशोर पाठक के सेवा जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय कारगिल युद्ध यानी ऑपरेशन सफेद सागर से जुड़ा रहा। युद्ध के दौरान वे चंडीगढ़ एयर बेस पर तैनात थे। युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य विमानों में बम और अन्य हथियार लोड करने की जिम्मेदारी उनके दायित्वों का हिस्सा रही। युद्ध के समय वायुसेना के अभियानों में प्रत्येक संसाधन और प्रत्येक तकनीकी-सहायक कार्य की अपनी अहम भूमिका होती है। ऐसे समय में समयबद्धता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक होती है।

कारगिल संघर्ष के दौरान उनकी जिम्मेदारियां केवल युद्धक तैयारियों तक सीमित नहीं रहीं। घायल सैनिकों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था में योगदान देने के साथ-साथ वीरगति प्राप्त सैनिकों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई। युद्धभूमि से जुड़े इन अनुभवों ने उनके सैन्य जीवन पर गहरी छाप छोड़ी।ऑपरेशन पराक्रम के दौरान भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उस समय युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए यूनिट की तैयारियों के साथ-साथ यूनिट की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली। संवेदनशील सैन्य परिस्थितियों में सुरक्षा, सतर्कता और तत्परता बनाए रखना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहा।उनकी सेवा यात्रा में ऑपरेशन बालाकोट के समय की सक्रिय सेवा भी उल्लेखनीय रही। इस दौरान उन्होंने वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। तीन दशक से अधिक की सेवा में उन्होंने बदलती परिचालन परिस्थितियों, तकनीकी आवश्यकताओं और सैन्य चुनौतियों के बीच अपने दायित्वों को निरंतर प्राथमिकता दी।

सेवा के दौरान नवल किशोर पाठक को दीर्घकालीन और अनुकरणीय सेवा के लिए 9 वर्ष, 20 वर्ष और 30 वर्ष के गुड सर्विस मेडल प्राप्त हुए। इसके अलावा ऑपरेशन सफेद सागर (कारगिल) मेडल, ऑपरेशन पराक्रम मेडल, गुड कंडक्ट मेडल तथा 50 Years of Independence Medal से भी उन्हें सम्मानित किया गया।

31 अक्टूबर 2019 को वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनके जीवन में सैन्य अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना कायम है। उनका 32 वर्षों का सैन्य जीवन उन कर्मियों की भूमिका को सामने लाता है जो युद्ध के दौरान केवल अग्रिम मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि हथियारों की तैयारी, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और शहीद सैनिकों के सम्मानपूर्ण अंतिम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के माध्यम से भी राष्ट्र की सेवा करते हैं।

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