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*हो साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली अखिल भारतीय साहित्य परिषद से सम्मानित*

चाईबासा : कोल्हान के हो भाषा-साहित्य के अग्रणी साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली को एक बार फिर साहित्यिक सम्मान से नवाजा गया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, नई दिल्ली की ओर से शुक्रवार को लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज, जमशेदपुर में आयोजित भारतेंदु साहित्य उत्सव में उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद की झारखंड इकाई और कला-साहित्य परिषद, एलबीएसएम कॉलेज, जमशेदपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों ने भाग लिया। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. अशोक कुमार झा, प्रिंसिपल, एलबीएसएम कॉलेज, करनडीह के हाथों डोबरो बुड़ीउली सहित अन्य भाषाओं के साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

सम्मान मिलने पर डोबरो बुड़ीउली ने कहा कि हो भाषा की लिपि वारंग क्षिति के खोजकर्ता, हो साहित्यकार और दार्शनिक लाको बोदरा की जयंती से एक दिन पहले सम्मानित होना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने अपना यह सम्मान लाको बोदरा को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि कोल्हान में हो साहित्य सृजन और वारंग क्षिति लिपि के विकास की नींव लाको बोदरा ने रखी थी। आज उसी नींव पर अनेक साहित्यकार निरंतर साहित्य सृजन कर रहे हैं।

डोबरो बुड़ीउली ने हो भाषा में लिखी जा रही साहित्यिक रचनाओं को सम्मान देने के लिए अखिल भारतीय साहित्य परिषद की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि परिषद आगे भी विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने का काम जारी रखेगा।

कार्यक्रम में पूरे झारखंड से पहुंचे विभिन्न भाषाओं के लेखक, कवि और साहित्यकारों ने अपनी कविताओं एवं साहित्यिक रचनाओं की प्रस्तुति दी। इससे समारोह में साहित्यिक माहौल बना रहा।

ज्ञात हो कि सदर प्रखंड के बरकुंडिया गांव निवासी डोबरो बुड़ीउली पिछले तीन दशक से अधिक समय से हो भाषा-साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने टाटा कॉलेज से दर्शनशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। उनके नाम अब तक 800 से अधिक कविताओं की रचना का रिकॉर्ड बताया जाता है।

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