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जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने सरकार से 48 घंटे में मांगा जवाब

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत हुई जेएसएससी-सीजीएल समेत अन्य नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक बरकरार रखी है। मंगलवार को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज कुमार खेस एवं अन्य सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। अदालत ने सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए दोपहर 2.15 बजे तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत इस संबंध में औपचारिक आदेश भी जारी करेगी। मामले की मेरिट पर अगली सुनवाई 17 सितंबर को सुबह 10.30 बजे होगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और नवनियुक्त कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए लंबा समय नहीं दिया जा सकता। अदालत ने जांच की प्रगति पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि उसे पुलिस की जांच पर पूरा भरोसा है, लेकिन शुरुआती जांच के बाद जांच की गति कुछ धीमी नजर आ रही है। अदालत ने सरकार से जांच और नियुक्तियों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के माध्यम से चयनित होकर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों की ओर से इन याचिकाओं को दायर किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने और अभ्यर्थियों के चयन के बाद पूरे प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले से बड़ी संख्या में लोगों का भविष्य प्रभावित होगा। इसी आदेश के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता श्रेय मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा, कुमार हर्ष, अमृतांश वत्स, दीपांकर राय, अर्पण मिश्रा और अंकित विशाल ने अदालत में पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने पक्ष रखा।

दरअसल, सीआईडी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात जेएसएससी की उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिनकी प्रक्रिया में टीडीपीएल की भूमिका सामने आने की बात कही गई थी। इसके साथ ही वर्ष 2014 से आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को लेकर भी जांच का निर्णय लिया गया था। इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षाओं को रद्द करने, कुछ परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।

सरकार के निर्णय में कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने तथा 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल किए जाने का उल्लेख है। इन फैसलों का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जिन्होंने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता हासिल कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की थी। अब हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य सवाल यह है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने का सरकार का निर्णय कानूनी रूप से कितना उचित है और इसका असर पहले से चयनित तथा नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकारों पर किस तरह पड़ेगा।

फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगी रोक को जारी रखते हुए मामले की सुनवाई 17 सितंबर को तय की है। उस दिन अदालत मामले के विभिन्न कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगी।

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