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नुआखाई पर्व पर गंडा समाज ने की अनुसूचित जाति में शामिल करने और सरकारी अवकाश की मांग

जमशेदपुर। मंगलवार को नुआखाई पर्व के अवसर पर अखिल भारतीय गंडा समाज ने झारखंड में गंडा जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने और नुआखाई पर्व पर सरकारी अवकाश घोषित करने की मांग उठाई है। अखिल भारतीय गंडा समाज, जमशेदपुर, झारखंड के केंद्रीय महासचिव कुंज विभार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस दिशा में शीघ्र पहल करने का अनुरोध किया है।

कुंज विभार ने कहा कि नुआखाई ओडिशा का प्रमुख पारंपरिक लोकपर्व है, जिसका संबंध नई फसल के स्वागत, कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता से है। पश्चिमी ओडिशा के साथ झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में भी इस पर्व को उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। उत्कल संस्कृति से जुड़े परिवार नुआखाई के माध्यम से अपनी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखते हैं।

उन्होंने कहा कि भाद्रपद शुक्ल पंचमी को मनाए जाने वाले नुआखाई का अर्थ ‘नया खाना’ है। नई धान की फसल से तैयार अन्न को सबसे पहले आराध्य देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार के लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं और नवान्न भोज के साथ पर्व मनाते हैं। घरों की साफ-सफाई, नए वस्त्र धारण करने, पारंपरिक पकवान बनाने तथा रिश्तेदारों और समाज के लोगों से ‘नुआखाई जुहार’ करने की परंपरा इस पर्व की विशेष पहचान है।

कुंज विभार ने कहा कि पश्चिमी ओडिशा की तरह झारखंड में भी नुआखाई पर्व बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसलिए राज्य सरकार को इस पर्व के महत्व को देखते हुए सरकारी अवकाश की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नुआखाई के अवसर पर गंडा समाज को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की पहल और सरकारी छुट्टी की घोषणा समाज के लिए बड़ी सौगात होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से दोनों मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

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