जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा थाना क्षेत्र के बाटालुका गांव में शनिवार की सुबह नक्सल विरोधी सर्च अभियान के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। गांव के कितापाठ जाहेरथान के समीप सर्च अभियान से लौट रही एलआरपी टीम को सैकड़ों ग्रामीणों ने करीब पांच घंटे तक घेरकर रखा। टीम में पटमदा थाना प्रभारी बिष्णु चरण गोप के अलावा भुईयांसिनान कैंप के एसटीएफ जवान भी शामिल थे। बारिश के बीच पुलिसकर्मी सुबह करीब पांच बजे से दस बजे तक ग्रामीणों के घेरे में रहे।
जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस और सुरक्षा बलों की टीम शुक्रवार शाम दलमा रेंज के अलग-अलग इलाकों में नक्सलियों की तलाश में अभियान पर निकली थी। अभियान के दौरान एक करोड़ रुपये के इनामी भाकपा माओवादी आकाश उर्फ असीम मंडल, 15 लाख रुपये के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन सहित अन्य नक्सलियों की तलाश की जा रही थी। सुरक्षा बलों ने झुंझका, मेघादह, राजाबासा, अपो और सारी होते हुए बाटालुका गांव में भी तलाशी अभियान चलाया।
बताया जा रहा है कि तलाशी अभियान के दौरान पुलिस टीम ने गांव के कुछ घरों में नक्सलियों और उनके कथित सहयोगियों की तलाश की। इसी क्रम में शनिवार तड़के बाटालुका निवासी लक्खन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों भारती सोरेन व सूमी सोरेन को पुलिस अपने साथ लेकर पैदल लौट रही थी। इस दौरान घर में मौजूद लक्खन सोरेन की दस वर्षीय बेटी पार्वती के रोने और शोर मचाने से आसपास के ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई।
इसके बाद बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों के हाथों में लाठी-डंडे थे। देखते ही देखते ग्रामीणों ने पुलिस और सुरक्षा बलों की टीम को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रामीणों ने लक्खन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों को छोड़ने की मांग की। इसके साथ ही बुधवार से पटमदा थाना में हिरासत में रखे गए बाटालुका निवासी युधिष्ठिर महतो को भी मुक्त करने की मांग की गई।
ग्रामीणों ने पुलिस टीम को स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक सुरक्षा बलों को वहां से जाने नहीं दिया जाएगा। स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मी वरीय अधिकारियों के निर्देश का इंतजार करते रहे। इस दौरान इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही।
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच गतिरोध समाप्त कराने का प्रयास शुरू किया गया। करीब नौ बजे स्थानीय जिला पार्षद प्रदीप बेसरा की पहल पर पटमदा थाना से युधिष्ठिर महतो को घटनास्थल पर लाया गया। इसके बाद संबंधित लोगों को छोड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस और सुरक्षा बलों की टीम को वहां से जाने दिया। लगभग पांच घंटे बाद स्थिति सामान्य हो सकी।
घटना के संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने भी मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस स्तर पर पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और आगे की कार्रवाई को लेकर विचार-विमर्श किए जाने की बात सामने आ रही है।

