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शिबू सोरेन की प्रतिमा का विरोध करने वाले पहले बताएं, कोल्हान के वीर शहीदों के सम्मान में अब तक क्या किया: बुधराम लागुरी

चाईबासा। टाटा रोड बाईपास, चाईबासा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित किए जाने का विरोध कर रहे बीरसिंह बिरुली और अन्य लोगों के बयान पर झारखंड आंदोलनकारी सिंहभूम के केंद्रीय प्रवक्ता एवं झामुमो जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी संगठन या व्यक्ति को वास्तव में कोल्हान के वीर शहीदों और महान विभूतियों के सम्मान की चिंता है, तो उसे पहले यह बताना चाहिए कि अब तक इस दिशा में उसने क्या ठोस पहल की है।

बुधराम लागुरी ने कहा कि जो लोग आज वीर शहीदों की प्रतिमा लगाने की बात कर रहे हैं, वे यह सार्वजनिक करें कि उन्होंने कोल्हान के वीर शहीदों की प्रतिमा स्थापित कराने के लिए जिला प्रशासन को अब तक कितने आवेदन दिए हैं। यदि आवेदन दिए गए हैं तो उनकी प्रतिलिपि, आवेदन की तिथि और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता रहे हैं और झारखंड की पहचान तथा अस्मिता की लड़ाई में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे नेता की प्रतिमा का विरोध करना झारखंड आंदोलन के इतिहास और उसकी विरासत को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कोल्हान के वीर शहीदों की प्रतिमाएं भी शहर के चौक-चौराहों पर स्थापित कराने की इच्छा है, तो उसके लिए सकारात्मक पहल करनी चाहिए, न कि किसी दूसरे नेता की प्रतिमा का विरोध।

बुधराम लागुरी ने कहा कि महापुरुषों और शहीदों का सम्मान किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है। कोल्हान के वीर शहीदों की प्रतिमाएं भी स्थापित होनी चाहिए और दिशोम गुरु शिबू सोरेन जैसे झारखंड आंदोलनकारी नेताओं की प्रतिमाएं भी लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक के सम्मान के लिए दूसरे के सम्मान का विरोध करना उचित नहीं है।

उन्होंने बीरसिंह बिरुली और उनके समर्थकों से पूछा कि यदि वे वास्तव में कोल्हान के वीर शहीदों के सम्मान के पक्षधर हैं, तो अब तक उन्होंने कितने शहीदों की प्रतिमा स्थापित कराने के लिए प्रशासन को आवेदन दिया है और इस दिशा में क्या आंदोलन या पहल की है, इसकी जानकारी सार्वजनिक करें।

बुधराम लागुरी ने जिला प्रशासन से भी मांग की कि यदि कोल्हान के वीर शहीदों और महान विभूतियों की प्रतिमा स्थापित करने के संबंध में किसी संगठन की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है, तो उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि शहीदों के सम्मान की मांग केवल बयान तक सीमित है या इसके लिए वास्तविक प्रयास भी किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंड वीर शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और आंदोलनकारियों की धरती है तथा सभी को समान सम्मान मिलना चाहिए। लेकिन किसी एक महापुरुष की प्रतिमा का विरोध कर दूसरे के सम्मान की बात करना जनता को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन कोल्हान के वीर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित कराना चाहता है तो वह प्रशासन को आवेदन दे, आंदोलन करे और सरकार से मांग रखे। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के सभी वीर शहीदों और महापुरुषों को सम्मान दिलाने की सकारात्मक पहल का स्वागत किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा, रूंगटा और दरवाजे के पीछे से भाजपा की दलाली कर राजनीति करने वाले कथित नेताओं को जनता जवाब देगी।

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