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Wed. Jul 29th, 2026

रहबर फाउंडेशन ने 100 जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भरता की सौगात दी, फल-सब्ज़ी कारोबार के लिए ठेले वितरित

जमशेदपुर। रहबर फाउंडेशन ने अपने मिशन “जरूरतमंद लोगों की मदद और गरीबी उन्मूलन” के तहत जुगसलाई ईदगाह मैदान में 100 गरीब, विधवा एवं बेरोज़गार लोगों के बीच फल और सब्ज़ी बेचने के लिए ठेलों का वितरण किया। संस्था की इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए उन्हें सम्मानजनक स्वरोज़गार से जोड़ना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

कार्यक्रम से पहले संस्था ने सभी लाभार्थियों का गहन सत्यापन किया। इसके बाद प्रत्येक पात्र व्यक्ति को नया ठेला प्रदान किया गया। साथ ही व्यवसाय शुरू करने में किसी तरह की कठिनाई न हो, इसके लिए हर ठेले के साथ आठ से दस प्रकार के ताज़े फल और सब्ज़ियां भी उपलब्ध कराई गईं, जिससे लाभार्थी पहले ही दिन से अपनी आजीविका का संचालन शुरू कर सकें।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में गुलाम रसूल बलियावी, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह ख़ान, डॉ. ज़रकानी तथा मौलाना रौशन ज़मीर नूरी उपस्थित रहे। अतिथियों ने रहबर फाउंडेशन के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि गरीबी दूर करने का सबसे प्रभावी उपाय लोगों को रोजगार और स्वरोज़गार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को मेहनत के बल पर सम्मानपूर्वक कमाने का अवसर मिलता है, तो वह न केवल अपने परिवार का भविष्य संवारता है, बल्कि समाज की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ठेले प्राप्त करने वाले लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। कई विधवा महिलाओं और बेरोज़गार युवाओं ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है। अब वे किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने परिश्रम से परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगे।

रहबर फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल राहत सामग्री उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को स्थायी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसी सोच के साथ समय-समय पर स्वरोज़गार आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सम्मानजनक आजीविका का अवसर मिल सके।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि सामाजिक संस्थाएं, उद्योग जगत और सरकार मिलकर रोजगार आधारित योजनाओं को बढ़ावा दें, तो गरीबी और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। रहबर फाउंडेशन की यह पहल केवल 100 ठेलों के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि 100 परिवारों को आत्मनिर्भरता की नई दिशा देने और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवनयापन का अवसर उपलब्ध कराने का एक प्रेरणादायी प्रयास है।

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