जमशेदपुर। सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के बाराद्वारी निवासी पूर्व नौसैनिक सिद्धनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना में अपने सेवाकाल के दौरान निभाई गई जिम्मेदारियों और चुनौतीपूर्ण अभियानों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि समुद्र में हर पल सतर्कता, धैर्य और रणनीतिक क्षमता की परीक्षा होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने हर परिस्थिति में अपने साहस और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए देश की समुद्री सुरक्षा और सम्मान की रक्षा की है।
सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि चिल्का स्थित नौसैनिक प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वर्ष 1994 में उनकी पहली तैनाती भारतीय नौसेना के फ्लीट टैंकर आईएनएस शक्ति पर हुई। यह युद्धपोत समुद्र में तैनात अन्य नौसैनिक जहाजों और विमानवाहक पोतों को ईंधन तथा आवश्यक रसद उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में एक विदेशी समुद्री अभियान के दौरान आईएनएस शक्ति पाकिस्तान की समुद्री सीमा के निकट पहुंचा था। इसी दौरान जहाज का रडार खराब हो गया, जिससे अन्य भारतीय युद्धपोतों से संपर्क टूट गया। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के कई नौसैनिक जहाजों ने आईएनएस शक्ति को चारों ओर से घेर लिया और लगातार चेतावनी दी जाने लगी। लगभग दो घंटे तक तनावपूर्ण हालात बने रहे। बाद में भारतीय नौसेना से संपर्क स्थापित होने के बाद युद्धपोत आईएनएस राजपूत तेज गति से मौके पर पहुंचा। जहाज के पहुंचते ही उसकी युद्धक तैयारियों और स्पष्ट चेतावनी के बाद पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज पीछे हट गए और आईएनएस शक्ति सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र की ओर रवाना हो गया।
पूर्व नौसैनिक सिद्धनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान सोमालिया में संचालित एक महत्वपूर्ण अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मिशन के दौरान स्थिति सामान्य होने के बाद वहां की तत्कालीन सरकार ने भारतीय सैनिकों से जहाज और हथियार छोड़कर लौटने की मांग की थी, जिसे भारतीय नौसेना ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद भारत से अतिरिक्त युद्धपोत सोमालिया भेजे गए। वहां पहुंचकर भारतीय नौसेना ने रणनीतिक रूप से समुद्री घेराबंदी की और स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय जहाजों एवं हथियारों को बिना किसी शर्त के तत्काल मुक्त किया जाए। भारतीय नौसेना की मजबूत सैन्य तैयारी और रणनीतिक दबाव के बाद अंततः भारतीय जहाजों और हथियारों को सुरक्षित वापस कर दिया गया।
सिद्धनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना केवल देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दुनिया के किसी भी हिस्से में भारतीय नागरिकों, सैनिकों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि नौसेना का अनुशासन, साहस, तकनीकी दक्षता और रणनीतिक सोच ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसका अनुभव उन्हें अपने पूरे सेवाकाल के दौरान लगातार मिलता रहा।

