जमशेदपुर। भारतीय नौसेना के पूर्व पेटी ऑफिसर एवं नेवल डाइवर योगेश्वर नन्द सिंह का सैन्य जीवन साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक उदाहरण है। लगभग 15 वर्षों तक नौसेना में सेवाएं देने वाले योगेश्वर नन्द सिंह ने अपने पूरे कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण नौसैनिक अभियानों और जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने 1 फरवरी 2002 को भारतीय नौसेना में भर्ती होकर देश सेवा की शुरुआत की और 31 जनवरी 2017 को सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए।
सेवा के दौरान उन्होंने नेवल डाइवर का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसके बाद उन्हें समुद्र के भीतर संचालित होने वाले अत्यंत चुनौतीपूर्ण अभियानों की जिम्मेदारी सौंपी गई। नेवल डाइवर के रूप में उन्होंने खोज एवं बचाव अभियान, जहाजों का अंडरवाटर निरीक्षण, समुद्र में मरम्मत कार्य, विस्फोटक सामग्री की पहचान तथा अन्य विशेष नौसैनिक अभियानों में अपनी दक्षता का परिचय दिया। जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में शांत रहकर कर्तव्य निभाने वाली इस सेवा को भारतीय नौसेना की सबसे कठिन जिम्मेदारियों में गिना जाता है।
अपने सैन्य कार्यकाल के दौरान योगेश्वर नन्द सिंह ने आईएनएस चिल्का, आईएनएस शिवाजी (लोनावला), आईएनएस निरूपक, एनएवीसीसी पोर्ट ब्लेयर, लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी शिप एलसीयू-35 तथा आईएनएस मकर सहित कई महत्वपूर्ण नौसैनिक प्रतिष्ठानों और जहाजों पर अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने विभिन्न परिचालन अभियानों और प्रशिक्षण गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए राष्ट्र की समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारतीय नौसेना में उत्कृष्ट सेवाओं और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें दीर्घ सेवा मेडल तथा अंडमान मेडल से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनके समर्पण, साहस और उत्कृष्ट सैन्य योगदान की पहचान हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी योगेश्वर नन्द सिंह सामाजिक जीवन में सक्रिय हैं और युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश सेवा के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक सैनिक का सबसे बड़ा सम्मान अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना और राष्ट्रहित को सदैव सर्वोपरि रखना है।

