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सच्चा धर्म मनुष्य को प्रेम, विवेक, समता और मानवता की ओर ले जाता है ईश्वर रूपातीत हैं तथा समस्त सृष्टि में एक ही परम चेतना का वास है

जमशेदपुर: जमशेदपुर आनंद मार्ग प्रचारक संघ का आनंद मार्ग जागृति, कांड्रा में आयोजित आनंद मार्ग प्रचारक संघ के द्वितीय संभागीय सेमिनार में मुख्य प्रशिक्षक आचार्य नभातीतानन्द अवधूत ने “रूप और रूपातीत” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि अनंत ब्रह्म को किसी सीमित रूप में पूरी तरह बाँधा नहीं जा सकता। ईश्वर रूपातीत हैं तथा समस्त सृष्टि में एक ही परम चेतना का वास है। नाम और रूप के कारण दिखाई देने वाले भेद वास्तविक नहीं, बल्कि अज्ञान का परिणाम हैं।

उन्होंने कहा कि साधना का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ या व्यक्तिगत मुक्ति नहीं, बल्कि मन की शुद्धि, आत्मचेतना का विकास तथा समस्त प्राणियों में एक ही परमात्मा का अनुभव करना है। सच्चा धर्म मनुष्य को प्रेम, विवेक, समता और मानवता की ओर ले जाता है, जबकि संकीर्णता और भेदभाव आध्यात्मिक उन्नति में बाधक हैं।

आचार्य ने कहा कि ज्ञान, कर्म और भक्ति—तीनों साधना के अनिवार्य आधार हैं। ज्ञान सही दिशा देता है, कर्म उसे जीवन में उतारता है और भक्ति साधना में प्रेम एवं मधुरता का संचार करती है। भक्ति कोई बाहरी कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि जीव के भीतर जागृत दिव्य प्रेम है।

उन्होंने बताया कि सच्चा साधक अन्याय और शोषण के विरुद्ध खड़ा होता है तथा समाज में समता, सेवा और मानव कल्याण के लिए कार्य करता है। गुरु की कृपा, आत्मसमर्पण और नियमित साधना से मन शुद्ध होता है, संस्कारों का बंधन समाप्त होता है और साधक परम चेतना की अनुभूति की ओर अग्रसर होता है।

व्याख्यान के अंत में उन्होंने कहा कि संसार के सभी नाम और रूप अस्थायी हैं, जबकि परमब्रह्म ही शाश्वत सत्य है। परमात्मा की प्राप्ति बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि शुद्ध मन, साधना, भक्ति, प्रेम और आत्मसमर्पण से संभव है।

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