चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम के तीन दिवसीय दौरे के समापन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को भाजपा जिला कार्यालय बासाटोंटो में प्रेस वार्ता कर जिले की खनन व्यवस्था, डीएमएफटी फंड के उपयोग, कानून-व्यवस्था और झींकपानी स्थित अडानी एसीसी सीमेंट कंपनी को बंद किए जाने के प्रस्तावित फैसले सहित कई मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा।
प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुँवर गागराई, पूर्व सांसद एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष गीता कोड़ा, भाजपा के वरिष्ठ नेता जे.बी. तुबिद, पूर्व विधायक शशिभूषण सामड, पूर्व विधायक एवं भाजपा जिला अध्यक्ष (चक्रधरपुर) गुरुचरण नायक सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि तीन दिनों के दौरान उन्होंने सारंडा सहित पश्चिमी सिंहभूम के विभिन्न खनिज संपदा वाले क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जाना और विकास कार्यों की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि लौह अयस्क खदानों की नीलामी नहीं होने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम हो गए हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जिले की कई खदानों की नीलामी लंबित है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। बाबूलाल मरांडी ने इसके लिए हेमंत सोरेन सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि एक ओर सरकार खदानों की नीलामी नहीं करा रही है, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि इस मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा और सरकार से खदानों की शीघ्र नीलामी कराने तथा अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की जाएगी।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
डीएमएफटी फंड के उपयोग को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में पश्चिमी सिंहभूम जिले को जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) मद से लगभग 3,700 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार जिले को हर वर्ष 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलती है, लेकिन इसके अनुरूप सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमएफटी फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और स्थानीय लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए डीएमएफटी की व्यवस्था लागू की गई थी। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास करना था, लेकिन झारखंड में इसका अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान झींकपानी स्थित अडानी एसीसी सीमेंट कंपनी को 16 अगस्त से बंद किए जाने के प्रस्तावित फैसले का भी मुद्दा उठा। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एसीसी बचाओ संघर्ष समिति की ओर से उन्हें ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि वे अपने स्तर पर फैक्ट्री को बंद होने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को भी गंभीर पहल करनी चाहिए, क्योंकि यह हजारों परिवारों के रोजगार और आजीविका से जुड़ा हुआ विषय है।

