जमशेदपुर। वह बोल नहीं सकती थी, अपनी तकलीफ किसी से बयां नहीं कर सकती थी, लेकिन परिवार के लिए वह महज एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि घर की सदस्य थी। अब उसी बेजुबान की मौत को लेकर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप सामने आया है। मामला पूर्वी सिंहभूम जिले का है, जहां एक मादा कुतिया की मौत के बाद उसके पालक परिवार ने उपायुक्त से न्याय की गुहार लगाई है।
मंगलवार को दविंदर सिंह, इंदरजीत सिंह और रणजीत सिंह ने उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को सागर हांसदा और मोहित मंडल कुतिया को इलाज के लिए अपने साथ ले गए थे। 14 अक्टूबर को उसका ऑपरेशन किया गया और 16 अक्टूबर को उसे घर वापस छोड़ दिया गया।
परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल नहीं होने के कारण उसके अंदरूनी टांके खुल गए। 17 अक्टूबर से उसके शरीर से लगातार खून बहने लगा। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समय पर समुचित उपचार नहीं मिलने से उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार 25 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया।
कुतिया की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। शिकायत में कहा गया है कि जिस जीव की देखभाल और इलाज की जिम्मेदारी ली गई थी, उसकी पीड़ा को समझना और समय पर उपचार उपलब्ध कराना भी संबंधित लोगों का दायित्व था।
परिवार ने ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक, इलाज में शामिल व्यक्तियों और सागर हांसदा व मोहित मंडल की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। साथ ही ऑपरेशन के बाद टांके खुलने और लगातार रक्तस्राव के कारणों का पता लगाकर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बेजुबान जानवर अपनी तकलीफ बोलकर नहीं बता सकते, लेकिन उनकी जिंदगी भी उतनी ही मूल्यवान है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

