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नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव के खिलाफ मानकी-मुंडा संघ का आंदोलन, नोवामुंडी में धरना

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी, गुवा, मनोहरपुर और झींकपानी को नगर पंचायत का दर्जा देने की तैयारी के खिलाफ मानकी-मुंडा संघ ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को कोल्हान-पोड़ाहाट, नोवामुंडी अंचल समिति के नेतृत्व में नोवामुंडी प्रखंड परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न गांवों से पहुंचे मानकी-मुंडा प्रतिनिधियों ने पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, ग्रामीणों के अधिकारों और स्थानीय जनभावनाओं का हवाला देते हुए नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की।

धरना के माध्यम से संघ ने प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मुद्दे उठाए। प्रतिनिधियों ने नोवामुंडी, गुवा, मनोहरपुर और झींकपानी को नगर पंचायत बनाने की प्रस्तावित योजना पर रोक लगाने, डीएमएफटी फंड में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने, नोवामुंडी बाजार को अतिक्रमण मुक्त करने तथा सामुदायिक शौचालयों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण फैसले स्थानीय लोगों की सहमति और उनकी भावनाओं को नजरअंदाज कर नहीं लिए जाने चाहिए। मानकी-मुंडा की पारंपरिक व्यवस्था यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में नगर पंचायत गठन के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले संबंधित गांवों के लोगों की राय लेना आवश्यक है।

वक्ताओं ने डीएमएफटी फंड के उपयोग में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए इसकी पारदर्शी जांच कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। वहीं, नोवामुंडी बाजार में बढ़ते अतिक्रमण और सामुदायिक शौचालयों की बदहाल सफाई व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई गई।

मानकी-मुंडा संघ ने प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। धरना के जरिए प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों के हितों और पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े सवालों पर उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।

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